Tuesday, 19 March 2013

तीन रुपये चावल, दो रुपये गेहूं देने का रास्‍ता साफ! तीन रुपये चावल, दो रुपये गेहूं देने का रास्‍ता साफ!

dainikbhaskar.com


नई दिल्‍ली. यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के ड्रीम प्रोजेक्‍ट फूड सिक्‍योरिटी बिल को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। मंगलवार को पीएम की अगुवाई वाली कैबिनेट ने संशोधनों के साथ इस बिल को हरी झंडी दे दी। इस बिल के तहत देश की दो तिहाई आबादी को सस्‍ता अनाज देने का प्रावधान है। बीजेपी ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया है। वहीं, बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने टिप्‍पणी की है कि कांग्रेस सत्‍ता में लौटने का जुगाड़ जानती है। 
 
सरकार इसके लिए अंत्‍योदय अन्‍न योजना ला रही है जिसके तहत 2.43 करोड़ गरीब परिवारों को भोजन मुहैया कराया जा सकेगा। फूड सिक्‍योरिटी बिल के प्रावधानों के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को चावल तीन रुपये प्रति किलो और गेहूं 2 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दिए जाने की योजना है। ज्‍वार, बाजरा जैसा मोटा अनाज एक रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलेगा। इस योजना का देश के 67 फीसदी लोगों को फायदा मिलेगा। देश की करीब 75 फीसदी ग्रामीण और 50 फीसदी शहरी आबादी इस कानून के दायरे में आएगी।  
 
इस बिल के तहत प्रति व्‍यक्ति सात किलो और प्रति परिवार सात किलो अनाज प्रति माह दिए जाने की योजना है। यह योजना लागू होने से शुरुआत में सरकारी खजाने पर 23 हजार करोड़ का अतिरिक्‍त बोझ आएगा। योजना लागू होने पर सरकारी खजाने पर कुल 1.3 लाख करोड़ का सब्सिडी बोझ आएगा। केंद्रीय खाद्य मंत्री के वी थॉमस ने कहा है कि इसी हफ्ते इस बिल को संसद में मंजूरी दिलाने की कोशिश की जाएगी।
 
गौरतलब है कि इससे पहले भी इस बिल को संसद में पेश करने की कोशिश हुई थी लेकिन कुछ राज्‍यों के विरोध के चलते यह फैसला टालना पड़ा था। दिसंबर 2011 में लोकसभा में पेश इस बिल में सरकार ने 'प्रायरिटी हाउसहोल्‍ड्स' को हर व्‍यक्ति के लिए सात किलो गेहूं (दो रुपये प्रति किलो) और चावल (तीन रुपये प्रति किलो) दिए जाने का प्रावधान था। 'जनरल हाउसहोल्‍ड्स' के लिए तीन किलो अनाज सरकार द्वारा तय कीमत के आधे पर दिया जाना था। संसद की स्‍थायी समिति की सिफारिशों के मद्देनजर इस बिल में संशोधन किए गए हैं। 

Read more »

सरकार ने की युवाओं को ग़लत समझने की ऐतिहासिक ग़लती ; देश ने रोक ली


sabhar dainik bhaskar 


सारा देश, कोई दस दिन से आक्रोशित था। घर-घर में बात हो रही थी। तीखी बात। हर कोई पूछता : आखिर सरकार को हो क्या गया है? वह हमारे 16 साल के बच्चों को सेक्स के लिए उकसाना क्यों चाहती है? 'भास्कर' ने देश में सबसे पहले 'संबंधों' की उम्र कम किए जाने के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। जन युद्ध। जिम्मेदारी निभाने के उद्देश्य से। अपने करोड़ों पाठकों के प्रति। समाज के प्रति। देश के प्रति।

प्रश्न केंद्र सरकार की महिलाओं की सुरक्षा के लिए कठोर कानून बनाने में हो रही ग़लती का ही नहीं था। न ही इसका कि शादी की उम्र 18 रहते हुए भी वह संबंधों की उम्र 16 वर्ष कर 'विवाह पूर्व सेक्स' को मान्यता देने की भयंकर भूल क्यों कर रही है? प्रश्न इन सभी से कहीं बड़ा था। प्रश्न भारतीय समाज के 'फैमिली वेल्यू सिस्टम' को तोडऩे के प्रयास का था। यह हमारे बच्चों के बारे में था। जिस पर सिर्फ हमारा और हमारा ही अधिकार है। किन्तु बंद कमरों में कुछ मंत्री बैठकर फैसला कर रहे थे। कर चुके थे। धिक्कारा जाना था। सो धिक्कारा गया। 

किन्तु जब 'भास्कर' के माध्यम से राष्ट्रीय विरोध उभरा, तब भी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पूरी तरह आंखें बंद कर, अपनी मर्जी से यह फैसला ले लिया। तब देश सकते में आ गया। एक ही प्रश्न था - ऐसा क्या है इस समाज विरोधी प्रस्ताव में? क्या फायदा? क्या इतने चतुर राजनीतिज्ञ नहीं समझ पा रहे कि सारा देश ग़ुस्सा हो रहा है? नेता और सरकारें हर काम फायदे के लिए ही करते हैं। तो क्या इस बात में वे अपना फ़ायदा भूल गए? क्या है ऐसा? 

यही वह प्रश्न है - जिसका उत्तर ढूंढना आवश्यक है। निश्चित ही देश ने सही कहा - नेता व सरकारें हर काम राजनीतिक फायदे के लिए ही करते हैं। यहां भी उन्होंने भारी फायदा देखा। उन्हें लगा - देश में 65 करोड़ युवा हैं, जो निरंतर खुल रहे हैं। बढ़ रहे हैं। मीडिया-टीवी-इंटरनेट-मोबाइल ने उन्हें दुनिया दिखा दी है। कम उम्र में। नेटवर्किंग। सोशल नेटवर्किंग। कई तरह की महत्वाकांक्षाएं। बढ़ती-खुलती इच्छाएं। बस, यहीं ग़लती हो गई मंत्रियों से। ग़लती नहीं, बल्कि ऐतिहासिक ग़लती। हमारे बच्चों- युवाओं को आंकने में। पहचानने में। मंत्रियों को लगा, विरोध तो बड़े बुजुर्ग कर रहे हैं। युवा तो खुले दिल से अपना लेंगे। नौजवानों को भरोसा हो जाएगा कि यही सरकार उन्हें और उनकी आवश्यकताओं को समझती है। व्यावहारिक ढंग से। बदलते समाज को पहचानती है। आधुनिक है। अल्ट्रा मॉडर्न युवा, अल्ट्रा मॉडर्न नेतृत्व ही तो चाहते हैं। यानी यहां कच्ची उम्र के करोड़ों युवाओं में साल- दो साल बाद करोड़ों वोटरों को ढूंढा जा रहा था। युवा वोटों की राजनीति थी यह। इन युवा वोटों की ही वजह है कि राष्ट्रीय दबाव के दौरान द्रमुक, वामपंथी और बसपा जैसे कुछ विपक्षी दल भी ललचाए थे। 

इसी कड़ी में सरकार ने संभवत: 18 से कम उम्र में अपराध करने को 'बचपना' मानना ही जारी रखा है। 

बस यहीं ग़लती हुई। भारतीय युवा, खुले जरूर हैं किन्तु उनकी आस्था पारिवारिक मूल्यों में ही हैं। निश्चित ही कम उम्र में दुनियादारी की समझ आने लगी है। जिस सोशल नेटवर्किंग को सरकार पहले भी $गलत समझते हुए दमन करना चाहती थी, उस पर युवा क्या कर रहे हैं, यह मंत्रियों को नहीं पता। परिवार के फोटो शेयर कर रहे हैं दोस्तों से। कैट, नेट, गेट, सेट की क्या तैयारियां चल रही हैं, यह लिख रहे हैं। सब-कुछ खुला है। काफी कुछ ग़लत भी हो रहा है। उसे रोकने के लिए परिवार चिंतित हैं और कुछ न कुछ कर रहे हैं। किंतु उसके लिए उन्हें सरकार की जरुरत नहीं है। कुल जमा, आज की नई पीढ़ी शिक्षा, सेहत और भविष्य को लेकर जितना काम कर रही है - उतना पहले कभी नहीं हुआ। 

दिल्ली की नृशंस वारदात के बाद देश में अभूतपूर्व जागरूकता आई है। युवाओं का सबसे बड़ा योगदान रहा है उसमें। उन्हीं युवाओं ने सड़कों पर उतरकर महिलाओं की सुरक्षा के कठोर कानून बनाने पर विवश किया था। उन्हीं युवाओं ने 'संबंधों' की उम्र घटाने को भी पुरजोर नकार दिया है। विरोधी राजनीतिक पार्टियां इसे समझकर सरकार को सीधे रास्ते पर लाईं हैं। 'भास्कर' ने देश की भावना के अनुरूप ही अपनी जिम्मेदारी निभाई है। भारत के सबसे बड़े समाचार पत्र सबसे बड़े और सर्वाधिक सराहे जाने वाले समाचार पत्र समूह के रूप में 'भास्कर' के अपने विज़न में तय किया है कि वह सामाजिक-आर्थिक बदलावों का माध्यम बनेगा। इसमें स्पष्ट है कि समाज पर थोपे जाने वाले ग़लत और जनहित-विरोधी बदलावों के विरुद्ध खुलकर आवाज़ उठाना और जागरूकता पैदा करना। राजनीतिज्ञ, चाहे किसी दल या विचारधारा के हों, अपनी सुविधा और लाभ-शुभ के लिए ऐसे ग़लत बदलाव हम पर थोप सकते हैं। इसलिए हमें, हम आम भारतीय नागरिकों को ही, आंखें खुली रखनी होंगी। भास्कर हमेशा जगाता रहेगा।

Read more »

महिला डॉक्टर संग नौकर की हत्या, छोटी बहन को है एक खास रिश्ते पर शक


source by dainik bhaskar  
salman
महिला डॉक्टर संग नौकर की हत्या, छोटी बहन को है एक खास रिश्ते पर शकइंदौर। स्कीम नंबर 114, पार्ट वन में तीन वर्ष पहले हुए डॉ. वर्षा वर्मा और उनके नौकर के चर्चित हत्याकांड में सोमवार को नया मोड़ आ गया। डॉ. वर्षा की बहन ने कोर्ट में यह शंका जताकर सनसनी फैला दी कि बहन की हत्या में उसके पति डॉ. घनश्याम वर्मा का हाथ हो सकता है। पुलिस ने इस मामले में आरोपी सरमन शिवहरे को ग्वालियर जेल से लाकर अदालत में पेश किया था।
 
सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश अवनींद्रकुमार सिंह की अदालत में वर्षा की छोटी बहन डॉ. प्राची पति कमल चौधरी निवासी साईं कृपा कॉलोनी के बयान हुए। प्राची ने कहा- वह भी रोज बहन के स्कीम नंबर 114 स्थित डेंटल क्लीनिक में जाकर काम सीखती थी।
 
घटना 4 फरवरी, 2010 को शाम छह बजे घटी। मैं घटना के 10 मिनट बाद क्लीनिक पहुंची, तब देखा कि क्लीनिक का गेट बंद है और वहां सन्नाटा था। गेट खोला तो वर्षा और नौकर राम खून से लथपथ पड़े दिखे। परिजन और वर्षा के पति उन्हें एम्बुलेंस से निजी अस्पताल ले गए। मुझे एंबुलेंस में नहीं बैठने दिया। राम को भी वहीं पड़ा छोड़ गए।

Read more »

दुल्हन बिकाऊ है: महाराष्ट्र में 30 हजार में बिक रही हैं लड़कियां!


sours dainik bhaskar 
salman 
दुल्हन बिकाऊ है: महाराष्ट्र में 30 हजार में बिक रही हैं लड़कियां!नई दिल्ली. महाराष्ट्र में सूखा बहुत बड़ा संकट लेकर आया है। इसे पिछले 40 सालों का सबसे भयंकर सूखा माना जा रहा है। सूखे की मार सबसे ज्यादा विदर्भ और मराठवाड़ा के इलाकों पर पड़ी है। (लाचार होकर 4 से 12 हजार में बीवी-बेटियों को बेच रहे लोग)
 
 
 
इस मुश्किल भरे वक्त में विदर्भ और मराठवाड़ा के इलाकों में दुल्हनों की खरीद-फरोख्त का कारोबार जोरों पर है। दुल्हनों के ऐसे कारोबार में लगे हुए एजेंट सूखे से उपजी गरीबी का फायदा उठाने से नहीं चूक रहे हैं। वैसे महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु से लड़कियों को मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब ले जाकर बेचने का शर्मनाक काम काफी पहले से चल रहा है। लेकिन महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में सूखे की वजह से इस चलन ने जोर पकड़ लिया है। 

Read more »

JANTA TV

Watch live streaming video from jantatv at livestream.com

Famous Posts

Followers