Friday, 30 March 2012

सोना बाज़ार बंद अब केसे हो बिटिया की शादी

 SARFARAZ AHMAD
KANPUR REPORTER
        EXCISE DUTY के बदने की वजह से हफ्ते भर से बंद चल रहे सोना बाज़ार की वजह से जहा कारोबारियों को करोडो का चुना लगा है वही आम जनता को भी कई सारी दिक्कतों का सामना करना पद रहा है.
                      सुषमा देवी से बताती हे की घर में बिटिया की शादी है पर सोना बाज़ार बंद होने की वजह से शादी के जेवर नही खरीद पाई है.ऐसा कोई एक मामला नही है कई और लोग भी इस परेशानी से जूझते नज़र आरहे है.
                      वही गहना पेलेस के मालिक इरफ़ान का कहना है की इतनी लम्बी हड़ताल से बहोत  लम्बा नुकसान तो हुआ पर इतनी लम्बी छुट्टी से मिलने से वो थोड़े बहोत  खुश भी हे क्रिकेट का शोक रखने वाले इरफ़ान ने बताया की फ़िलहाल वो इस हड़ताल का मज़ा ले रहे है और साथ ही साथ दुआ भी कर रहे है की सरकार सोना कारोबारियों की मांगे मान ले
     .वेसे इस हड़ताल का कितना असर हुआ है यह देखना अभी बाकि है 

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झमझम कान्सेप्ट: इशाक मोहम्मद तीन अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर


sabhar the bhaskar
zaid ali kanpur reporter
चिटफंड कंपनी झमझम के माध्यम से लाखों रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोपी को न्यायालय ने तीन अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर सौंपा है। पुलिस के अनुसार मामले में गिरफ्तार इशाक मोहम्मद पुत्र मोहम्मद हुसैन मंसूरी को न्यायालय में पेश किया गया।


 
जहां से उसे तीन अप्रैल तक रिमांड पर सौंपा गया। पुलिस उससे पूछताछ कर और जानकारी प्राप्त करने के प्रयास में जुटी हुई है।

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Monday, 26 March 2012

पुरुष की वैसी कमजोरी और परेशानी दूर करते हैं ये 6 उपाय.


M SALMAN KHAN 
Source: धर्म डेस्क. उज्जैन
सुखी और स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी है कि व्यक्ति शारीरिक रूप से शक्तिशाली बना रहे। शरीर में किसी भी प्रकार की कमजोरी होने से जीवन में दुख और समस्याओं को बढ़ावा मिलता है। यदि किसी पुरुष में वैसी कमजोरी हो तो उसका वैवाहिक जीवन सुखी नहीं रह सकता है। अधिकांश लोगों को अत्यधिक स्वप्नदोष होने की परेशानी रहती है। वैसे तो यह एक सामान्य सी बात है लेकिन जब ये समस्या हद अधिक हो जाए तो शारीरिक कमजोरी उत्पन्न होने लगती है। पुरुषों की इस कमजोरी और परेशानी को दूर करने के लिए आयुर्वेद में कई उपाय बताए गए हैं। उनमें से 6 उपाय इस प्रकार हैं-

- इस प्रकार की परेशानी में आंवला बहुत फायदेमंद होता है। अत: प्रतिदिन रात्रि में गिलास में थोड़ा सा हुआ सुखा आंवले का चूर्ण लें और उसमें पानी भर दें। सुबह उठने के बाद इस पानी में हल्दी मिलाएं एवं छानकर पीएं।

- जिन लोगों को अत्यधिक स्वप्नदोष होने की समस्या है वे प्रतिदिन अंावले का मुरब्बा खाएं।

- केला पुरुष की शक्ति बढ़ाने वाला फल है। प्रतिदिन केले खाएं एवं संभव हो तो केले खाने के बाद दूध भी पीएं।

- रोज रात को लहसुन की दो कलियां रात को सोने से पहले निगल लें। इसके बाद थोड़ा सा पानी पीएं।

- आंवले के चूर्ण में मिश्री पीसकर मिलाएं। इसके बाद प्रतिदिन रात को सोने से पहले करीब एक चम्मद इस मिश्रित चूर्ण का सेवन करें। इसके बाद थोड़ा सा पानी पीएं।

 - अनार के छिलको सूखा लें और पीस लें। इसके बाद प्रतिदिन सुबह और शाम एक चम्मद इस चूर्ण को खाएं।

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चावल का ये उपाय लगातार करें तो बन जाते हैं मालामाल


SALMAN KHAN
Source: धर्म डेस्क. उज्जैन
चावल को अक्षत भी कहा जाता है और अक्षत का अर्थ है अखंडित। जो टूटा हुआ न हो वही अक्षत यानि चावल माना गया है। शास्त्रों के अनुसार यह पूर्णता का प्रतीक है। इसी वजह से सभी प्रकार के पूजन कर्म में भगवान को चावल अर्पित करना अनिवार्य माना गया है। इसके बिना पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है। चावल चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्त को देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

धन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कई सटीक उपाय बताए गए हैं। जिन्हें अपनाने से सभी प्रकार के ग्रह दोष दूर होते हैं और आय बढऩे में आ रही समस्त रुकावटें दूर हो जाती हैं। यदि किसी ग्रह दोष के कारण आपकी आय बढऩे में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं तो संबंधित ग्रह का उपचार करें। इसके साथ ही यह उपाय अपनाएं-

प्रति सोमवार शिवलिंग का विधिवत पूजन करें। पूजन में बैठने से पूर्व अपने पास करीब आधा किलो या एक किलो चावल का ढेर लेकर बैठें। पूजा पूर्ण होने के बाद अक्षत के ढेर से एक मुठ्ठी चावल लेकर शिवजी को अर्पित करें। तत्पश्चात शेष बचे चावल को मंदिर में दान कर दें या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दे दें। ऐसा हर सोमवार को करें। इस उपाय को अपनाने से कुछ ही समय में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने लगेंगे। ध्यान रहे इस दौरान किसी भी प्रकार का अधार्मिक या अनैतिक कर्म न करें। अन्यथा उपाय का प्रभाव निष्फल हो जाएगा।

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एशिया कप छिनने के डर से घबराया पाकिस्तान

M SALMAN KHAN 
Source: DAINIK BHASKAR

ढाका. बीते कई सालों में पहला खिताब जीत कर खुशी मना रही पाकिस्‍तानी क्रिकेट टीम को जल्‍द ही झटका लग सकता है। उससे एशिया कप का खिताब छीन कर बांग्‍लादेश को दिया जा सकता है। 
एशिया कप फाइनल मुकाबले के दिन पाकिस्तानी गेंदबाज ऐजाज चीमा ने बांग्‍लादेश के खिलाड़ी महमुदुल्लाह रियाद का मैदान पर रास्ता रोका था। अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने इस घटना की इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) से शिकायत करने का फैसला किया है। आईसीसी का फैसला अगर बीसीबी के हक में आया तो पाकिस्‍तान को एशिया कप खिताब से हाथ धोना पड़ेगा।   
 
लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के इस फैसले पर निराशा जाहिर की है। पीसीबी के निदेशक इंतखाब आलम ने बांग्लादेश के फैसले को निराशाजनक करार दिया है। आलम ने कहा, 'बीसीबी के पदाधिकारियों के बयान दुखद और निराश कर देने वाले हैं। वह एक रोमांचक फाइनल था, जिसमें हर किसी ने बांग्लादेश की तारीफ की थी। उनका अपील करने का फैसला बाद में सोचा गया कदम है। तथ्य यही है कि किसी मैच अंपायर या रेफरी ने पाकिस्तान प्रबंधन या बांग्लादेश से इस बारे में शिकायत नहीं की है। बांग्लादेश की अपील फाइनल मैच को किरकिरा कर देगी, जिसका सबने आनंद लिया।'
 
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने फाइनल मैच मात्र दो रन के अंतर से जीता था। माना जाता है कि चीमा ने बांग्लादेशी पारी के अंतिम ओवर के दौरान जानबूझकर रियाद का रास्ता रोकने की कोशिश की थी। उस समय वह दो रन लेने की कोशिश कर रहे थे। अब बीसीबी का कहना है कि अगर चीमा ने वैसी हरकत नहीं की होती तो मैच टाई हो गया होता। बांग्लादेश ने चीमा की हरकत के एवज में पांच रन दिए जाने की मांग की है। ऐसा हुआ तो बांग्लादेश पहली बार एशिया कप का खिताब हासिल कर लेगा।   
 
बीसीबी के प्रेजिडेंट इनायत हुसैन सिराज ने कहा, 'नियम के मुताबिक अगर रन लेते वक्त बल्‍लेबाज का रास्ता रोका जाता है तो फिर वह गेंद डेड करार दी जाएगी और बैटिंग करने वाली टीम को पांच रन पेनल्टी के तौर पर मिलेंगे। जिस वक्त चीमा ने रियाद का रास्ता रोका था, उस समय हमें जीतने के लिए छह गेंदों पर चार रन चाहिए थे। फुटेज से साफ है कि चीमा ने जानबूझकर रियाद का रास्ता रोका था।'  
रियाद ने इस संबंध में तुरंत अंपायरों से शिकायत की थी, जिसके बाद अंपायर स्टीव डेविस ने दोनों खिलाड़ियों से बात की थी। घटना के वक्त चीमा गेंदबाजी कर रहे थे। अब बांग्‍लादेश को आईसीसी के फैसले का इंतजार है

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RCM Busness से जुड़े लोगों के संघर्ष को सलाम!


भंवर मेघवंशी
हम अक्सर जन संघर्षों में गाते है - ‘‘जयपुर की सरकार तू बोले क्यूं नी रे, बोले क्यूं नी रे, मुण्डो खोले क्यूं नी रे।’’ मतलब यह कि जयपुर की सरकार तू बोलती क्यों नहीं है और अपना मुंह खोलती क्यों नहीं है? शायद इसलिए कि राजस्थान की सरकार गूंगी सरकार है, लेकिन आरसीएम उपभोक्ता एवं वितरक कल्याण संघ के बैनर तले चल रहे प्रचण्ड जन अभियान की मांगों को अनसुना कर रही केंद्र की यूपीए सरकार से पूछने का मन करता है कि दिल्ली की सरकार, तू सुनती क्यों नहीं रे?
संपूर्ण स्वदेशी उत्पाद बेचने वाली शुद्ध भारतीय व्यापारिक कंपनी आरसीएम पर की गई अवैधानिक कार्यवाही के बाद कंपनी को बंद हुए आज 105 दिन हो चुके। दिसंबर 2011 से पुलिस के तुगलकी रवैये, हठधर्मिता और अपने अघोषित व कथित अज्ञात आकाओं के ईशारों पर उसने आरसीएम वल्र्ड पर चढ़ाई की, कार्यवाही की, उसे सीज किया और सर्वर तथा संपूर्ण वितरण व्यवस्था को ठप्प करने का बेहद नासमझी भरा कदम उठाया, खैर, वह मामला अब जेरे अदालत है, मगर आरसीएम से जुड़े 1 करोड़ 33 लाख लोग इस हिटलरी पुलिसिया कार्यवाही से पीडि़त होकर बेरोजगार हो चुके है, यह अत्यंत चिंता का विषय है।

करोड़ों लोगों के रोजगार के सवाल को आरसीएम उपभोक्ता एवं कल्याण संघ ने बड़ी शिद्दत से उठाया है। भीलवाड़ा पुलिस की कार्यवाही के विरुद्ध निहायत ही गांधीवादी तरीके से 12 दिसंबर को भीलवाड़ा शहर की सड़कों पर हजारों लोगों ने शांतिपूर्ण मौन जुलूस निकाला। भीलवाड़ा की सड़कें इनके अनुशासित गांधीवादी संघर्ष के शुरूआत की साक्षी है। तब से अब तक आरसीएम के लाखों हमदर्दों ने कहीं भी कोई हिंसक गतिविधि या अभद्रता नहीं की, जिस महात्मा गांधी का नाम राजस्थान की सरकार और केंद्र की यूपीए सरकार लेते नहीं अघाती है, उसी गांधी के आर्दशों का अनुकरण कर रहे है ये भले लोग, मगर जयपुर से लेकर दिल्ली तक बैठी गूंगी, बहरी सरकार इस मामले पर न तो कुछ बोलती है और न ही सुनती है।


अब तक आरसीएम से जुड़े लोग कई बार मुख्यमंत्री सहित कई मंत्रियों, सांसदों से मिल चुके, उन्हें ज्ञापन सौंपे है, देश भर से सौंपे गए ज्ञापनों, धरनों, प्रदर्शनों व शांतिपूर्ण रैलियों की संख्या तो हजारों को पार कर चुकी है। मगर शांतिपूर्ण, अहिंसक, गांधीवादी तरीकों की कद्र करना इन कथित सत्ताधारी गांधीवादियों के वश की बात नहीं रही है। जैसा कि हम जानते है कि लोगों का आंदोलन विभिन्न राज्यों के नगरों, महानगरों व राजधानियों में होता हुआ दिल्ली के रामलीला मैदान होते हुए जंतर-मंतर पहुंच चुका है। हजारों लोगों ने 16 मार्च से देश की राजधानी में डेरा डाल रखा है, पहले इन निहत्थे अहिंसक शांतिपूर्ण गांधीवादी तरीके से आंदोलन करने के अभिलाषी लोगों को रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति दी गई, फिर यकायक वापस ले ली गई। यह समझना जरा मुश्किल है कि सरकारें अपने नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकारों का इस प्रकार कैसे हनन कर सकती है? मगर, खुलेआम कर रही है।

जिन सत्ताओं के जन विरोधी तरीकों के विरुद्ध नागरिक प्रदर्शन करना चाहते है उन्हें सत्ता विरोधी अथवा व्यवस्था विरोधी धरना प्रदर्शनों की इजाजत सरकार से लेनी पड़े तो इसे इस युग की विडंबना ही कहा जाना चाहिए, कितने लोग आएंगे? कहां से आएंगे? क्या नारे लगाएंगे? भाषण कौन देंगे? क्या देंगे? रैली कहां से कहां तक जाएगी? यह सब बातें सत्ता-व्यवस्था तय करने लगी है, इसे मैं व्यक्ति की आजादी और हमारे नागरिक अधिकारों पर सत्ता का हमला मानता हूं और इसीलिए आरसीएम के लोगों को पहले अनुमति देना और फिर उसे वापस लेने को लोकतंत्र में असहमति की आवाजों का गला घोंटने का कृत्य ही कहा जाएगा। ऐसी सरकारी नादिरशाही की निंदा की जानी चाहिए।

सत्ता कितनी निर्मम और निरंकुश होती है, यह आप बेहतर जान गए होंगे। क्योंकि आप में से सैकड़ों लोग अनशन पर है और कहीं कोई सुनवाई नहीं की जा रही है तो इसे संवेदनहीनता की पराकाष्ठा ही कहा जा सकता है। कल्याणकारी और समाजवादी राष्ट्र राज्य होने का दावा करने वाले भारत गणराज्य की आम आदमी के साथ होने का भ्रम फैला रही सरकार क्या आप लोगों का साथ दे रही है?

मैंने आपके अनुशासित प्रदर्शनों के चित्र देखे है जिसमें ‘हम हो गए बेरोजगार-सरकार है जिम्मेदार’ लिखा है अथवा ‘आरसीएम वितरण व्यवस्था बहाल करो’ या ‘एमएलएम कानून बनाओ’ की जायज मांगे आप द्वारा की जा रही है। जिन्हें देशभर के जिम्मेदार जन प्रतिनिधियों का खुला समर्थन मिला है। मेरा समर्थन पहले दिन से आपके साथ रहा है और भविष्य में भी जारी रहेगा।


आपकी आवाज आज आपके संघर्ष की बदौलत जंतर-मंतर की सड़क से लेकर देश की संसद तक में गूंज रही है। मैंने बीकानेर के माननीय सांसद अर्जुन मेघवाल, भाजपा प्रवक्ता शहनवाज हुसैन और नर्बदा बचाओ आंदोलन की अगुवा, प्रणेता व भारत में जन संघर्षों की जुझारू प्रतीक बन गई मेधा पाटकर का जंतर-मंतर पर आपको दिया संबोधन सुना। उन्होंने और उनके अलावा 36 और सांसदों ने आपकी वाजिब मांगों का समर्थन किया है, यह शुभ शुरूआत है। हालांकि जो सरकारें पांच मिनट में बिना किसी बहस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) जैसे कितने ही कायदे पारित कर देती है, वह सरकार हजारों प्रदर्शनकारियों व सैकड़ों अनशनकारियों की मांग पर ध्यान तक नहीं दे रही है क्योंकि उसका ध्यान तो रिटेल में एफडीआई लाने के दुराग्रह पर स्थिर है। देश की जनता जो चाहती है, सत्ता वह नहीं करती है, जनता कालाधन वापस लाने की मांग कर रही है, सरकार उस पर श्वेत पत्र लाने की बात कर रही है? मैं पूछता हूं श्वेत पत्र ही लाओगे या कालाधन भी लाओगे? आप लोगों ने अर्द्धनग्न होकर रामलीला मैदान के बाहर एमसीडी के फुटपाथों पर प्रदर्शन करने का साहसिक कार्य भी किया है मगर मुझे लगता है कि जिस सत्ता के समक्ष आप अर्द्धनग्न प्रदर्शन कर रहे हो, वह सत्ता संपूर्ण नंगी हो चुकी है। बहरी हो चुकी है, गूंगी हो चुकी है और जनविरोधी हो चुकी है।

लेकिन फिर भी हम तो यह मानते है कि ‘सरकार हमारे आपकी-नहीं किसी के बाप की’ इसलिए उससे नाउम्मीद होने की जरूरत नहीं है, जनतंत्र में जनता मालिक होती है और सरकारें मुनीम तथा ब्यूरोक्रेसी नौकर। इसलिए लगे रहना पड़ता है, एमएलएम का कानून लाने के लिए लगातार प्रयास करना पड़ेगा, तभी कामयाबी हासिल होगी।



किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र के नागरिकों का राजनीतिक शिक्षण होना जरूरी है, आपके लिए भी यह समय बहुत कुछ सीखने का समय है। आप जान पा रहे होंगे कि इस देश के मीडिया का चरित्र क्या है? सच्चाई, ईमानदारी, नैतिकता, निष्पक्षता और निर्भीकता का रात-दिन भौंपू बजाने वाला मीडिया सरासर इन जीवन मूल्यों के विरुद्ध काम करता है। चुनाव में पेडन्यूज छापने वाला, सत्ता के गलियारों की दलाल नीरा राडिया के लिए काम करने वाला भारतीय मीडिया अक्सर जन विरोधी काम करता है, सत्ता के लिए कवच बन जाता है और लोगों के वास्तविक मुद्दों के बजाय काल्पनिक मुद्दों को लाकर सनसनी पैदा करता है, अगर मीडिया जनहित में काम करता तो वह राजस्थान पुलिस द्वारा भीलवाड़ा में आरसीएम मुख्यालय पर की गई गैर जरूरी कार्यवाही पर सवाल उठाता। उसे देश भर से आरसीएम के पक्ष में उठी आवाजें सुनाई पड़ती, उसे भीलवाड़ा, जयपुर तथा रामलीला मैदान के संघर्ष दिखलाई पड़ते। उसे जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे लोगों की मांग और मुद्दों से सहानुभूति होती मगर अपराधियों के लिए इस मीडिया के पास वक्त है, भ्रष्ट राजनेताओं को उनका प्राइम स्पेस और प्राइम टाइम समर्पित है, उसे अन्ना हजारे के अनशन के एक-एक पल से सहानुभूति है मगर आर्थिक आजादी के दीवानों की जंग का वर्तमान दौर के बिकाऊ मीडिया की नजर में कोई मतलब नहीं है।.... मगर साथियों, निराश होने की कोई जरूरत नहीं है, आपकी आवाज धीरे-धीरे मजबूत होती जा रही है, वह दिन आने वाला है जब पुलिस, प्रशासन, सत्ता और मीडिया सबको आप लोगों की बात सुननी पड़ेगी और आपकी जायज मांगों को स्वीकारना पड़ेगा, मगर बढ़े हुए कदमों को पीछे मत खींचना। अपनी ताकत को निरंतर बढ़ाते रहना, अब तक 36 सांसद आपके मंच तक आए है, वह दिन आने वाला है जब शायद नहीं आने वाले सांसदों की संख्या महज 36 रह जाए बाकी सब आ जाए।

जो लोग आज यह कहकर पल्ला झाड़ रहे है कि हम क्या करे? कानून अपना काम कर रहा है, उनसे हमारा यही कहना है कि इस मामले में तो आपके मुल्क में कोई कानून ही नहीं है, जिस कानून के तहत कार्यवाही हो रही है, वह जब बनाया गया था तब तो कानून निर्माताओं को प्रत्यक्ष व्यापार प्रणाली की समझ ही नहीं थी, यह पूरी प्रक्रिया तो चली ही नब्बे के दशक से है, तब ये ही मनमोहन सिंह, नरसिम्हराव सरकार में वित्तमंत्री हुआ करते थे, उस वक्त इन्होंने ही आर्थिक उदारीकरण, भूमंडलीकरण और निजीकरण के लिए इस देश के दरवाजे, खिड़कियां और छतें तक खोल दी थी, उसी जागतीकरण का नतीजा है प्रत्यक्ष व्यापार की प्रणाली। जब विदेशी पूंजी से लेकर विदेशी आकाओं के इशारे तक हमारी केंद्र सरकार मान रही है तब उसे तकरीबन 5 करोड़ लोगों को रोजगार मुहैय्या करवाने वाली प्रत्यक्ष व्यापारिक प्रणाली को स्वीकारने में कैसी दिक्कत है? फिर यह भी गंभीर सवाल है कि जब विदेशी ‘एम वे’ चल सकती है, देशी ‘एनमार्ट’ जायज है तो ‘आरसीएम’ गलत कैसे है? किनके इशारों पर नष्ट करने पर तुले हो? क्यों एक संपूर्ण स्वदेशी, शुद्ध भारतीय रिटेल श्रृंखला को समाप्त कर रहे हो? यह ऐसा सवाल है जो राजस्थान की सरकार से लेकर केंद्र की सत्ता के गलियारों में गुंजायमान है जिसका जवाब उन्हें देना ही पड़ेगा।


जितने साथी जंतर-मंतर पर इस जंग को लड़ रहे है उनके संघर्ष के जज्बे को मैं सलाम करता हूं। मेरी हार्दिक इच्छा है कि जंतर-मंतर की सड़क पर आपके समर्थन में बैठू, लेकिन 14 अप्रेल तक पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों की व्यस्तताओं के चलते फिलहाल राजस्थान के सुदूर अंचल के गांव, खेड़ों व ढाणियों में विचरण कर रहा हूं मगर आपके संघर्ष में मैं सहभागी हूं और आपकी जीत की शुभकामनाएं देता हूं। बस अपनी आवाज को और बुलंद करिए और बोलिए, ‘‘कहिए अपनी बात-मजबूती के साथ’’।

सुप्रसिद्ध शायर फैज अहमद फैज कहते है -

बोल, कि थोड़ा वक्त बहुत है

जिस्म ओ जबां की मौत से पहले

बोल, कि सच जिंदा है अब तक

बोल, जो कुछ कहना है, कह ले

बोल, कि लब आजाद है तेरे...।

पुनः आपके संघर्ष को सलाम! ‘‘वी शैल फाइट - वी शैल विन’’ लड़ेंगे -जीतेंगे।

 भंवर मेघवंशी

(लेखक राजस्थान के सुदूर ग्रामीण अंचल में मानव अधिकार के मुद्दों पर कार्यरत 

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अन्ना के अनशन को आरसीएम का समर्थन


M SALMAN KHAN
source the bhaskar  
दिल्ली के जंतरमंतर पर धरना दे रहे आसीएम सदस्यों का दर्द भले ही किसी की समझ में आए या न आए लेकिन आरसीएम के सदस्यों को देश का दर्द समझ में आता है। शायद इसीलिए आरसीएम ने 25 मार्च को हुए अन्ना के अनशन को न केवल अपना पूरा समर्थन दिया बल्कि पूरी संख्या में अनशन स्थल पर उपस्थिति भी दर्ज कराई। अनशन स्थल पर आरसीएम की तख्तियां स्पष्ट दिखाई दीं। हालांकि ये दीगर बात है कि मीडिया ने आरसीएम के मुद्दे को स्थान देने का कष्ट नहीं किया। 


नई दिल्ली : ऐतिहासिक जंतर-मंतर से जब समाजसेवी अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बिगुल बजाया तो वहां पहले से धरने पर बैठे दूसरे आंदोलनकारी भी अपना दर्द भूल गए। उनके चेहरे पर अपनी मांग पूरी न होने का दर्द नहीं, बल्कि देश से भ्रष्टाचार को समाप्त करने का जुनून दिख रहा था। सुबह से शाम तक सभी की जुबान पर एक ही बात थी कि अन्ना जिस भ्रष्टाचार के सफाए के लिए जनलोकपाल बिल लाने की बात कर रहे हैं, हम भी उसी भ्रष्टाचार के पीड़ित हैं। हमारे लिए यह अच्छी बात है कि अन्ना के आंदोलन में शामिल होने का अवसर मिला।

देशभर  से आए आरसीएम के हजारों सदस्य यहां अपनी मांगों के समर्थन में धरना दे रहे हैं। आरसीएम सदस्य सुदीप व ममता ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर आगे भी डटे रहेंगे, लेकिन आज एक दिन अन्ना के आंदोलन में शामिल होने से उन्हें देश के लिए कुछ करने का मौका मिला है। खास बात यह थी कि टीम आरसीएम को संबोधित कर रहे उनके नेता भी उस वक्त चुप हो जाते थे, जब मंच से अन्ना टीम का कोई सदस्य संबोधित करता था।

आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग कर को लेकर धरने पर बैठे ब्राह्मण आरक्षण संघर्ष समिति, हरियाणा के सैकड़ों सदस्य भी अन्ना के आंदोलन को समर्थन देते दिखे। यहां बैठे मनीष व जितेंद्र कहते हैं देश में जिस तरह से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, उससे देश की छवि धूमिल हो रही है। अगर भ्रष्टाचार खत्म हो जाता है तो हम एक स्वच्छ भारत में रह सकते हैं।

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Friday, 23 March 2012

गोल्ड सुख: पांच डायरेक्टर वियतनाम मैं गिरफ्तार


M Salman Khan 
source the bhaskar 
 
जयपुर।  डेढ़ लाख लोगों से 300 करोड़ रूपए की ठगी कर विदेश भागे गोल्ड सुख के अन्य पांच निदेशक मानवेन्द्र सिंह, प्रमोद शर्मा व उसकी पत्नी आशा, महेन्द्र कुमार व उसकी पत्नी नीतू को वियतनाम पुलिस ने मंगलवार को हनोई में गिरफ्तार कर लिया। पांचों को लुक आउट सर्कुलर के आधार पर पकड़ा गया है। मानवेन्द्र, प्रमोद व महेन्द्र कुमार कम्पनी के मुख्य कर्ताधर्ता थे। इन्होंने ही राजस्थान समेत दूसरे राज्यों में लाखों लोगों को ठगा। उधर, पांचों निदेशकों की गिरफ्तारी की सूचना के बाद पीडित लाखों निवेशकों को राशि मिलने की उम्मीद बंधी है। मामले में अब तक गोल्ड सुख के इन पांचों निदेशक समेत नौ निदेशक गिरफ्तार हो चुके हैं। अब पुलिस की नजर नामजद साढ़े तीन सौ एजेन्टों व लीडरों पर है।  
आरोपियों को लाने जाएगी टीम

वियतनाम दूतावास व इंटरपोल के माध्यम से राजस्थान पुलिस को इनकी गिरफ्तारी की सूचना मिली। निदेशकों को जयपुर लाने के लिए पांच अफसरों की टीम बनाई गई है। एक-दो दिन में  टीम वियतनाम रवाना हो जाएगी।

ईमेल से पता चला देश
फरार निदेशक मानवेन्द्र, महेन्द्र व प्रमोद ईमेल से दूसरे लोगों से बराबर सम्पर्क में थे। एडिशनल कमिश्नर अनिल पालीवाल ने बताया कि एक्सपर्ट से जांच में पता चला कि इन ईमेल का वियतनाम व थाईलैण्ड से आना-जाना था। इंटरपोल के जरिए वहां की पुलिस को सूचना दी गई। 

दबाव में थाईलैंड से भागे
पुलिस सूत्रों के मुताबिक कम्पनी बन्द होने के बाद सभी निदेशक थाईलैण्ड भाग गए। वहां पुलिस का दबाव बढ़ा तो वियतनाम भागे, लेकिन इंटरपोल की सूचना के बाद सचेत वियतनाम पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। ज्ञात हो एक पखवाड़ा पहले कम्पनी के निदेशक नरेन्द्र सिंह निर्वाण व उसकी पत्नी सरोज कंवर को बैंकॉक से दिल्ली हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था। पुलिस प्रमोद के निदेशक भाई रामेश्वर शर्मा व जगदीश को भी पकड़ चुकी है।

फोटो के जरिए चढ़े वियतनाम पुलिस के हत्थे
विधायकपुरी थाना प्रभारी राजेन्द्र दिवाकर ने बताया कि निदेशकों की गिरफ्तारी के लिए पहले रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर देश-विदेश के सभी एयरपोर्ट व अन्य जगहों पर सावचेत किया था। फिर सभी देशों में लुक आउट सर्कुलर के तहत इनकी गिरफ्तारी जरूरी बताई और फोटो भी भेजी गई। बताया जाता है कि फोटो के आधार पर पांचों निदेशक हत्थे चढ़े।

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आखिर क्यों सरकार को आरसीएम पसंद नहीं


source the bhaskar

आखिर क्यों सरकार को आरसीएम पसंद नहीं है? आइये जानें कुछ प्रमुख कारन- 1. आरसीएम धर्म,प्रांत,भाषा की सीमाओं से परे सबको मिल-जुल कर काम करना सिखाता है जबकि सरकार लोगों को एक दूसरे के बीच लड़वाकर अपनी वोट बेंक की गंदी राजनीति खेलती है !!! 2.आरसीएम स्वदेशी उत्पादों के जरिये अपने देश का पैसा अपने देशवासियो के बीच ही रखती है जबकि सरकार एफ़डीआई,वोलमार्ट के जरिये हमारे पसीने की कमाई विदेश भेजना चाहती है !!!


3.आरसीएम व्यसनमुक्त समाज की रचना करता है जबकि सरकार तम्बाकू,बीड़ी,सिगरेट,शराब,गुटखा जैसे हानिकारक उत्पादों के पास से टेक्स कमाना चाहती है !!! 4.आरसीएम स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों द्वारा एक स्वस्थ समाज की रचना चाहता है जबकि सरकार हेल्थकी ग्रान्ट के नाम पर भ्रष्टाचार करना चाहती है !!! 5.आरसीएम सजीव कृषि को बढ़ावा देकर किसानों और ज़मीनों को मजबूत बनाना चाहता है जबकि सरकार विदेशों के यूरिया जैसे ख़तरनाक रसायनिक खाध और ज़हरीले कीटनाशकों को बढ़ावा देकर जमीन और किसान दोनों को ख़तम करना चाहती है !!! अगर मजबूत और स्वस्थ भारत का निर्माण करना है तो सरकार की भ्रष्ट नीतियों से बचना पड़ेगा और सरकार को सदबूद्धि आए ऐसा कुछ करना पड़ेगा वरना...वापस....वो ही गुलामी के दिन...

जैसा की facebook पर विजय दीनानाथ चौहान ने लिखा

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श्री युनिमैक्स प्रमोटर्स के मेगा सेमिनार में राज काले का आगमन

M SALMAN KHAN 
बेरोजगारों को रोजगार देने और उनके सपनो को साकार करन के उद्देश के लिए कानपूर की आग्रहनि कंपनी  युनिमैक्स प्रोमोटर्स एंड डेवलोपर्स लिमिटेड ने आगामी २७ मई २०१२  को कानपूर में अपने मेगा सेमिनार में ज़बरदस्त मोटिवेशन के लिए जाने माने मोटिवेशनल ट्रेनर व स्पीकर राज मोहन काले को आमंत्रित किया है तीस वर्षों का अनुभव रखने वाले श्री राज मोहन काले लगभग दस वर्षों के बाद कानपूर आएंगे ये पहला  मौका होगा जब किसी कानपूर बेस कंपनी के लिए राज काले कानपूर अ रहे है उक्त जानकारी कम्पनी के मैनेजिंग डारेक्टर श्री लाल सिंह दी

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Saturday, 17 March 2012

सन्नी लियोन को सता रहा डर, न कर दें बिपाशा को शर्मिंदा!

M SALMAN KHAN 
Source: agency 


भारतीय मूल की कनाडाई पॉर्न अभिनेत्री सन्नी लियोन को उम्मीद है कि वह अपनी फिल्म 'जिस्म 2' में बिपाशा के समकक्ष दिख सकेंगी। लियोन को उम्मीद है कि वह पूर्व में अभिनेत्री बिपाशा बसु द्वारा 'जिस्म' के जरिए गढ़े गए मानक को कहीं छू सकेंगी।



तीस वर्षीया लियोन ने यहां एक साक्षात्कार में कहा, "मैंने बिपाशा को देखा है। वह पहली फिल्म में बहुत आकर्षक व अद्भुत दिखी हैं। मैं उम्मीद करती हूं कि मैं उनके द्वारा स्थापित मानक को छू सकूं व 'जिस्म 2' से उन्हें शर्मिदा न करूं।"



उन्होंने कहा, "मैं अच्छा काम करना चाहती हूं और उम्मीद करती हूं कि हर किसी को यह फिल्म पसंद आए।"



सन्नी ने रिएलिटी शो 'बिग बॉस 5' में हिस्सा लिया था। इसी शो के दौरान फिल्मकार महेश भट्ट ने उन्हें 'जिस्म 2' में अभिनय का अवसर देने का निर्णय लिया था। अब सन्नी को फिल्म की शूटिंग का इंतजार है।



साल 2003 में आई 'जिस्म' के कुछ हॉट दृश्यों के लिए चर्चा में रहीं बिपाशा को उम्मीद है कि फिल्म के अगले भाग में सन्नी अच्छा काम करेंगी।



बिपाशा ने कहा, "मैं उन्हें नहीं जानती लेकिन महेश भट्ट साहब उसी को फिल्म में लेते हैं जो भूमिका में जंचे। इसलिए मैं इसे लेकर सुनिश्चित हूं कि वह अच्छा काम करेंगी।"



'जिस्म 2' में रणदीप हुड्डा व अरुणोदय सिंह भी नजर आएंगे। 

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'सेक्स होता तो 'डर्टी पिक्चर' जैसी हिट हो जाती 'कहानी'


SARFARAZ AHMAD
Source: Esha Razdan   DAINIK BHASKAR
'द डर्टी पिक्चर' और 'कहानी' के जरिए दो लगातार हिट्स देकर विद्या बालन इन दिनों सांतवे आसमान पर हैं| हालांकि विद्या कहानी की सक्सेस से उतनी खुश नहीं हैं जितनी 'डर्टी पिक्चर की सफलता से थीं|
'डर्टी पिक्चर' की बॉक्स ऑफिस पर सफलता को असली मायनों में सही कहा जाएगा| वहीं कहानी की सफलता डर्टी पिक्चर को मिली सफलता जितनी खास नहीं है क्योंकि इसमें सेक्स नहीं था| सेक्स न होने से फिल्म उतनी हिट नहीं हो सकी जितनी होनी चाहिए थी|सेक्स के अलावा फिल्म में बहुत सारे गाने भी नहीं थे जो कि एक बॉलीवुड फिल्म में बहुत जरूरी होता है|
विद्या ने बातों ही बातों में खान तिकड़ी पर भी निशाना साधा और कहा कि उन्हें अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए खानों के साथ काम करने की जरूरत नहीं है| वह फिल्म की जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेकर उसे हिट कराने का माद्दा रखती हैं|
विद्या ने कहा कि वह फिल्म के चुनाव के समय स्क्रिप्ट को तवज्जो देती हैं, यह नहीं देखती कि उसमें कोई खान काम कर रहा है या नहीं|जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब ये समझा जाए कि वह खानों के साथ काम नहीं करेंगी तो उन्होंने कहा ऐसा नहीं है, वह उनके साथ फिल्में जरूर करना चाहेंगी मगर अच्छी स्क्रिप्ट उनकी पहली डिमांड होगी|

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सीरियल में दिखाए गए इस लवमेकिंग सीन में कुछ भी अश्लील नहीं'

AMIT SRIVASTAVA
Source: bhaskar network 


गुजरे ज़माने के मशहूर स्टार जितेंद्र ने सीरियल 'बड़े अच्छे लगते हैं' में दिखाए गए इंटिमेट सीन को सही ठहराया है| 12 मार्च को टेलीकास्ट हुए इस सीरियल के एपिसोड में 20 मिनट का सेक्सी सीन दिखाया गया था जिसकी काफी आलोचना की जा रही है| 



लोगों का मानना है कि टेलीविजन पर इस तरह के सींस दिखाया जाना बिलकुल सही नहीं है| मगर जितेंद्र का इस मामले में कहना कुछ और ही है| उन्होंने कहा राम कपूर और साक्षी तंवर पर फिल्माए गए इस सुहागरात सीन में कुछ भी अश्लील नहीं है, मैं इसे बिलकुल सही मानता हूं| इस सीन पर जो बेवजह बवाल मचाया जा रहा है वो बहुत ही छोटी मानसिकता का प्रमाण है| 



जितेंद्र इस सीरियल की निर्माता एकता कपूर के पिता हैं| एकता के भाई तुषार ने भी इस सीन के चलते आलोचना झेल रही अपनी बहन का बचाव किया है और कहा है कि टेलीविजन पर कुछ बंधनों को तोड़ना बहुत ही जरूरी है|मुझे नहीं लगता लोगों को साफ़ सुथरे सीरियल्स अच्छे लगते हैं क्योंकि अब तो इनपर भी अंगुली उठने लगी है| समीक्षक कभी भी खुश नहीं रह सकते और जो लोगों को पसंद आये हमें उसकी तारीफ करनी चाहिए| 

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ममता बोलीं-त्रिवेदी नहीं, मुकुल रॉय हैं रेलमंत्री


sarfaraz ahmad
Source: Agency 
नई दिल्ली/कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को लेकर तेवर तल्ख कर लिए हैं। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि अब रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी नहीं, बल्कि मुकुल रॉय हैं। उन्होंने त्रिवेदी के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है।
दूसरी तरफ, दिनेश त्रिवेदी भी अड़ गए हैं। शनिवार को मीडिया से बातचीत में दिनेश त्रिवेदी ने कहा, 'मुझे जब भी इस्तीफा देने के लिए कहा जाएगा, मैं इस्तीफा दे दूंगा। प्रधानमंत्री और ममता बनर्जी के बीच क्या बातचीत हुई, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। मैं जिम्मेदारी छोड़कर भागने वाला नहीं हूं। अभी मैं रेल मंत्री हूं और सोमवार को रेल बजट से जुड़े सवालों के जवाब देने की तैयारी करने जा रहा हूं।'  

आम बजट पेश होने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ा दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने फोन करके त्रिवेदी से इस्तीफे की मांग की है।

जानकारी के मुताबिक, बनर्जी ने त्रिवेदी को फोन कर उनसे इस्तीफा मांगा है। इस पर त्रिवेदी ने कहा कि उनसे लिखित तौर पर इस्तीफा देने के लिए कहा जाए। दो-तीन के अंदर पार्टी अध्यक्ष के निर्देश के बाद वह इस्तीफा दे सकते हैं।  ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दिनेश त्रिवेदी की जगह मुकुल रॉय को रेलमंत्री बनाए जाने की मांग की है।

तृणमूल कांग्रेस नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा था कि हमारी प्राथमिकता मूल्य वृद्धि पूरी तरह वापस कराने की है। सरकार कैसे करती है, सिर्फ उन्हें ये फैसला करना है। इस्तीफे के लिए अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस से लिखित आदेश की मांग कर रहे दिनेश त्रिवेदी के बारे में सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा है कि दिनेश त्रिवेदी को कुछ भी लिखकर नहीं दिया जाएगा। 

 
 
दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायण सामी ने शनिवार को कहा कि रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को हटाए जाने पर फैसला प्रधानमंत्री, यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी और ममता बनर्जी को लेना है। उन्होंने कहा कि त्रिवेदी का इस्तीफा तृणमूल का अंदरूनी मामला है।   

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चालाक मोदी देंगे राहुल को टक्कर: टाइम

M SALMAN KHAN
Source: DAINIK BHASKAR


नई दिल्ली. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भले ही अमेरिका जाने का वीजा ना मिला हो, लेकिन अमेरिका को मोदी की नेतृत्व क्षमता और उनकी कुशल राजनीति पर कोई शक नहीं। अमेरिका की प्रतिष्ठित व अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘टाइम’ के एशियाई संस्करण के कवर पेज पर उन्हें जगह देते हुए यह कहा है कि अगले लोकसभा चुनाव में गुजरात के मुख्यमंत्री कांग्रेस के 'युवराज' राहुल गांधी को चुनौती दे सकते हैं। 

पत्रिका के कवर पेज पर मोदी की तस्वीर है। पत्रिका ने मोदी की तारीफों के पुल बांधते हुए 'ब्वाय फ्राम द बैकयार्ड' शीर्षक से छपे लेख में कहा है, 'मोदी का मतलब है काम।' लेकिन पत्रिका ने सवाल भी उठाया है कि क्या मोदी भारत का नेतृत्व कर सकते हैं? पत्रिका ने अपनी कवर स्टोरी में लिखा, 'मोदी और राहुल के बीच संभावित मुकाबले पर लिखा, 61 साल के मोदी ही ऐसे प्रतिद्वंद्वी दिखाई पड़ रहे हैं जिनका ट्रैक रिकॉर्ड और पहचान राहुल गांधी से मुकाबले लायक है। कई लोग उनका नाम गुजरात में 2002 में हुए दंगों से जोड़ता है, लेकिन ऐसे भी लोग हैं जो यह मानते हैं कि मोदी ही ऐसी शख्सियत हैं जो देश को धुर भ्रष्टाचार और अक्षमता से बाहर निकाल सकते हैं। ऐसे लोगों का मानना है कि ऐसा दृढ़ नेता ही देश को विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ा सकता है ताकि भारत चीन जैसे देशों की पांत में शामिल हो सके।'

इस अमेरिकी पत्रिका ने मोदी को एक विवादित, महत्वाकांक्षी एवं चालाक राजनेता बताया है। इसमें राज्य के लोगों तक पहुंचने के लिए मोदी के दिन भर के सद्भावना उपवासों का भी उल्लेख है। लेख में लिखा है कि यह मोदी के बदलाव का अंदाज है। यह उनके आत्मशुद्धि, नम्रता और राज्य के लोगों को जोड़ने का काम है।

पत्रिका ने नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की तुलना की है। राहुल के बारे में पत्रिका ने लिखा है, '2014 के आम चुनाव में अब महज दो साल बचे हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि सोनिया के बेटे और पार्टी के नेता कांग्रेस में नई जान फूंक सकते हैं। लेकिन हाल ही में हुए राज्यों के चुनाव में मिली करारी हार ने उन्हें कमजोर साबित किया है।'  

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Tuesday, 13 March 2012

सोने जैसे 'अंगों' को सुनहरी बिकनी से ढंक रही हैं जेनिफर


SARFARAZ AHMAD Source: DAINIK BHASKAR)
 
 
 
 

जेनिफर निकोल आजकल मियामी में मौज-मस्ती करने में व्यस्त हैं। बीते दिन इस हॉट फिगर की मलिका को सुनहरी छोटी बिकनी पहने देखा गया।



36 वर्षीय इस फिटनेस ट्रेनर ने मियामी में सूरज की धूप सेंकते हुए अपने फैन्स को अपने हॉट फिगर के दर्शन कराए। इस दौरान जेनिफर ने की गोल्ड वॉच सहित उनके कानों के झुमके भी सुनहरी बिकनी से मेल खा रहे थे। जेनिफर ने गुलाबी लिपिस्टिक भी लगाई हुई थी।



तस्वीरों में देखिए इस जिम ट्रेनर का कसीला बदन...
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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कम से कम बच्चों के सामने तो एक्सपोज न करतीं वीना, देखिए तस्वीरें


M SALMAN KHAN 

Source: dainikbhaskar.com
 
 

 

पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक भी अपने बोल्ड अंदाज के लिए मशहूर हैं| अपने बोल्ड और बिंदास अंदाज की वजह से वह कई बार विवादों में फंस चुकी हैं| हाल ही में वीना ग्लेडरेग्स मॉडल हंट की आयोजिका मॉरीन वाडिया द्वारा रखे गए एक इवेंट में शिरकत करने पहुंची|



इस इवेंट में कुछ छोटे बच्चे को भी बुलाया गया था जिनसे वीना भी मिलीं| वैसे तो वीना फ़ॉर्मल लुक में ही इस इवेंट में पहुंची| मगर बच्चों के सामने भी वह एक्सपोज करने से बाज नहीं आईं| उन्होंने शॉर्ट पिंक कलर की शॉर्ट ड्रेस पहनी हुई थी जिसमें से उनका क्लीवेज साफ़ साफ़ नजर आया|



वीना ने भी कैमरे के सामने ऐसे पोज दिए जिसमें से उनका क्लीवेज ज्यादा से ज्यादा नजर आए| इस इवेंट में तारा शर्मा और दीपशिखा जैसी अभिनेत्रियां भी पहुंची थीं मगर उन्होंने वीना की तरह इस तरह से फोटो ग्राफरों को पोज दिया| देखिए इवेंट की कुछ खास तस्वीरें:
 
 
 
 
 
 
 
 

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बेटी ने भेजी फ्रेंड रिक्वेस्ट तो पापा ने भेज दीं अश्लील तस्वीरें!

SALMAN KHAN 
Source: bhaskar network 


सूरत। दो बेटियों के साथ पति से अलग रह रही एक विवाहिता ने यहां अपने पति के खिलाफ बेटी को अश्लील फोटो भेजने का आरोप लगाया है। यह मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है। विवाहिता के अनुसार पति ने अपनी ही सगी बेटी को फेसबुक पर अश्लील तस्वीरें भेजीं। अदालत ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।


पत्नी नीलाबेन द्वारा दर्ज शिकायत के अनुसार, राजकोट में वाणिज्यिक विभाग में कार्यरत अपने पति संजय गांधी से विवाद के चलते वह अपनी दो बेटियों के साथ अलग रहती है। हालांकि इनके तलाक का मामला भी अदालत में विचाराधीन है। नीलाबेन बेटियों के साथ अडाजण इलाके में रहती हैं।


नीलाबेन की नाबालिग बेटी ने गत 12 नवंबर को अपने कंप्यूटर से पापा को फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजी थी। इस रिक्वेस्ट के जवाब में पिता ने उसे लगभग 14 अश्लील फोटो भेज दिए। बेटी ने इसकी जानकारी नीलाबेन को दी। नीलाबेन ने पति की इस घिनौनी हरकत के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवा दी और अब यह मामला अदालत तक पहुंच चुका है। अदालत ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। 

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'इन वजहों से जनता ने राहुल को नकारा और अखिलेश को स्वीकारा'


M SALMAN KHAN 
Source: विनोद यादव  
मुंबई. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने उ.प्र. के होने वाले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तारीफ करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया है। उन्होंने अपनी विशिष्ठ ठाकरी शैली में कहा, ‘उ.प्र. का विकास हुआ, तो मुंबई सहित अनेक शहरों का भार हल्का हो जायेगा। 
 
इसलिए अखिलेश जैसे उच्च विद्याविभूषित को हम आशीर्वाद देते हैं। अब वे हाथ आये मौके का सोना करके दिखायें!’ ठाकरे द्वारा शिवसेना के मुखपत्र मराठी सामना में संपादकीय लिख के अखिलेश यादव को आशीर्वाद देना काफी महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। 
 
क्योंकि आमतौर पर वे सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायमसिंह यादव और मुंबई से सपा के विधायक अबू आसिम आजमी को खरी-खोटी सुनाने का एक भी मौका हाथ से नहीं जाने देते हैं। ठाकरे अक्सर मुलायम को मुल्ला मुलायम और आजमी को देशद्रोही साबित करने पर तुले रहते हैं। 

अखिलेश के बारे में क्या कहा ठाकरे ने 

शिवसेना प्रमुख ठाकरे ने कहा, ‘अखिलेश का हाथ स्वच्छ है। उनकी जीभ पर शक्कर है। यदि अखिलेश सही में उ.प्र. को उत्तम राज्य बनाने वाले हैं, तो उनका हम अभिनंदन करते हैं और आशीर्वाद देते हैं।’ वे इतने भर से नहीं रुके। उन्होंने कहा, ‘उ.प्र. की जनता को नयी सरकार के राज में सुख, समाधान, शांति व भरपूर लाभ हो। 

इस प्रकार की हम प्रार्थना करते हैं।’ लगे हाथ ठाकरे ने भी अखिलेश यादव और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के बीच तुलना करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में राहुल ने उत्तर भारतीय युवकों में स्वाभिमान जगाने का प्रयास किया और सवाल किया कि ‘भीख मांगने के लिए, आप मुंबई क्यों जाते हो?’ 

मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश के युवकों पर यह नौबत क्यों आई? जबकि उ.प्र. में 1985 तक कांग्रेस का ही शासन था। और इसी राज्य से पं. नेहरु लालबहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, व्ही.पी. सिंह, राजीव गांधी जैसे नेता देश के प्रधानमंत्री बने। इन्ही सब बातों की वजह से उ.प्र. की जनता ने चुनाव में राहुल गांधी को नकार दिया और अखिलेश को स्वीकारा।

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