Tuesday, 23 October 2012

सेक्स की लत एक तरह की मानसिक विकृति?


source by bbcnews.com
एक नये शोध से पता चला है कि 'सेक्स एडिक्शन' यानी सेक्स की लत एक तरह की मानसिक विकृति है जो स्वास्थ्य के लिए तो हानिकारक है ही, करियर के साथ-साथ रिश्तों को भी तबाह कर सकती है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि सेक्स के मामले में खुद पर काबू नहीं रख पाने वाले लोग अपनी और दूसरों की ज़िंदगी बर्बाद कर देते हैं, लेकिन मनोवैज्ञानिक इसे सही मायने में मानसिक असंतुलन मानने से हिचकते रहे हैं.

'डेली मेल' और 'टोरोंटो सन' अखबारों में छपी एक खबर के मुताबिक, शोधकर्ता इसके लक्षण बताते हुए कहते हैं कि इससे पीड़ित व्यक्ति 'सेक्स-फैंटेसी' में खोया रहता है और ये व्यवहार यदि छह महीने तक जारी रहता है तो ये 'सेक्स एडिक्शन' है.पर अब कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी के एक दल ने इस विकृति को एक मानसिक दशा के तौर पर परिभाषित किया है.
शोधकर्ताओं का ये भी कहना है कि इससे पीड़ित व्यक्ति यदि खुद को परेशान या अवसादग्रस्त महसूस करता है तो तनाव से निज़ात पाने के लिए बार-बार सेक्स करता है.

कुछ नामी-गिरामी मरीज

टाइगर वूड्स
टाइगर वूड्स भी सेक्स-एडिक्शन के शिकार हो गए थे.
"इस शोध से उन लोगों के उपचार में मदद मिलेगी जिन्हें सेक्स की लत लग गई है."
प्रोफेसर रॉरी रीड
'सेक्स एडिक्शन' के शिकार लोगों में मशहूर गोल्फ खिलाड़ी टाइगर वूड्स, हॉलीवुड स्टार माइकल डगलस और रसेल ब्रांड जैसे नाम शुमार हैं.
टाइगर वुड्स ने तो इसके लिए वर्ष 2010 में माफी तक मांगी थी. 'सेक्स एडिक्शन' से उबरने के लिए उन्होंने छह हफ्ते तक अपना इलाज भी कराया था.
रसेल ब्रांड ने भी माना कि उन्हें 'सेक्स एडिक्शन' था. वहीं माइकल डगलस इस लत से निज़ात पाने के लिए ऐरिजोना के एक क्लिनिक में भर्ती हुए थे.
शोध से जुड़े प्रोफेसर रॉरी रीड कहते हैं, ''इस शोध से उन लोगों के उपचार में मदद मिलेगी जिन्हें सेक्स की लत लग गई है.''
वे कहते हैं कि इसकी वजह से मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, साथ ही रिश्तों में और जीवन के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी असर पड़ता है.
शोधकर्ताओं ने इस नतीज़े पर पहुंचने के लिए मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सा केंद्रों में भर्ती 207 मरीजों का अध्ययन किया.
ये सभी वो मरीज थे जो अपने बेकाबू सेक्स व्यवहार या अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों से ग्रसित थे.
इस शोध के नतीज़े 'जर्नल ऑफ सैक्सुअल मेडिसिन' में प्रकाशित हुए हैं.

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थाइरॉयड से बचना है तो कैल्शियम लें


source by bbc news 
अगर आपके खाने की थाली से दूध, दही और मछली जैसी चीज़े ग़ायब हैं तो आप प्राइमेरी हाइपरपैराथाइरॉयडिज़्म (पीएचपीटी) जैसी बीमारी का शिकार हो सकते हैं.
एक अध्ययन में पता चला है कि भोजन में कैल्शियम की कमी से महिलाओं में हॉरमोन की समस्या हो सकती है. इससे थाइरॉयड से लेकर हड्डियों का कमज़ोर होना और किडनी में पत्थर होना शामिल है.

ब्रिटिश मेडिकल पत्रिका में छपे एक लेख में शोधकर्ताओं ने कहा है कि कैल्शियम की मात्रा बढ़ाने से इन बीमारियों के ख़तरे से बचा जा सकता है.अध्ययन के अनुसार आठ सौ लोगों में से एक पीएचपीटी के शिकार हो सकते हैं और पोस्ट-मेनोपॉजॉल या रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में ये बीमारी सबसे आम है.
वयस्कों को हर रोज़ 700 मिलीग्राम कैल्शियम लेने की सलाह दी गई है. लेकिन ज़्यादा कैल्शियम लेने से पेट दर्द और हैज़ा हो सकता है.
पीएचपीटी की बीमारी उस स्थिति में होती है जब पैराथाइरॉयड ग्लैंड ज़्यादा मात्रा में पैराथाइरॉयड हॉरमोन छोड़ते हैं.
हड्डी और किडनी के अलावा इससे हाई बल्ड प्रेशर और दिल की बीमारी होने का ख़तरा बना रहता है.

फ़ायदे और नुक़सान

कैल्शियम है ज़रूरी

  • कैल्शियम मज़बूत हड्डियाँ और दाँत बनाने में मदद करता है
  • कैल्शियम होने से खून में क्लॉटिंग सामान्य तरीके से होती है
  • दूध और डेयरी पदार्थ कैल्शियम का बेहतरीन ज़रीया हैं
  • मछली, फल, बादाम, सब्ज़ियों में भी कैल्शियम होता है
  • विटामिन डी भी ज़रूरी है क्योंकि इसकी मदद से कैल्शियम हड्डियों में अच्छे से रच पाता है.
अमरीका में नर्सेज़ हेल्थ स्टडी के तहत 58 हज़ार तीन सौ महिलाओं से बातचीत और उनकी जांच के नतीज़ों का अध्ययन किया गया.
1986 में जब ये अध्ययन शुरु किया गया था तो इन महिलाओं की उम्र 39 से 66 साल के बीच थी और इनमें से किसी को भी पीएचपीटी की बीमारी का कोई इतिहास नहीं था.
उन महिलाओं से हर चार साल पर ये पूछा जाने लगा कि वे क्या खाती हैं और उनमें कैल्शियम की मात्रा कितनी होती है.
इसी तरह से करते हुए उन महिलाओं से आख़िरी बार 2008 में वही प्रश्न पूछे गए.
22 वर्षों के बाद 2008 में 277 महिलाओं में पीएचपीटी की पुष्टि की गई.
अध्ययन में सामने आया है कि जिन महिलाओं के खाने में कैल्शियम की मात्रा सबसे ज़्यादा थी, उनमें सबसे कम कैल्शियम लेने वाली बाक़ी महिलाओं के मुक़ाबले पीएचपीटी होने की आशंका 44 फ़ीसदी कम हो जाती है.
ब्रिटिश पत्रिका में शोध लिखने वाली टीम की प्रमुख डॉक्टर जूली पाइक का कहना है, "महिलाएं अगर अपने भोजन में सीधे कैल्शियम लेती रहें तो पीएचपीटी के ख़तरे को कम किया जा सकता है."
फ़्लोरिडा स्थित नॉर्मन पैराथाइरॉइड के जेम्स नॉर्मन का कहना है कि अगर रोज़ाना कैल्शियम का डोज़ लिया जाए तो इसके ख़तरे कम और फ़ायदे ज़्यादा हैं.
लेकिन ब्रिटेन में विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम अपने रोज़ाना के भोजन से ही लेना चाहिए.

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बबलू की दामिनी जयपुर में भर्ती


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नारायण बारेठ
जयपुर से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

नन्हीं दामिनी के लिए कोई हाथ दवा के लिए उठा तो कोई दुआ के लिए. भरतपुर के रिक्शा चालक बबलू की एक माह की बेटी दामिनी की तबियत नासाज है.
बबलू नन्हीं दामिनी के साथ
बबलू को भरोसा है कि दामिनी जल्द ठीक हो जायेगी
उसे बेहतर इलाज के लिए भरतपुर से जयपुर लाया गया है जहाँ एक प्राइवेट हॉस्पिटल में डॉक्टर उसकी देखभाल कर रहे है. दामिनी के सिर पर माँ का साया नहीं है.

भरतपुर के जिला कलेक्टर जेपी शुक्ला ने बताया कि बबलू और दामिनी के साथ डॉक्टर, नर्स और एक सरकारी अधिकारी को भेजा गया है. इस दौरान दुनियाभर से लोग दामिनी और बबलू की मदद के लिए आगे आ रहे हैं.लिहाजा बबलू दोनों फर्ज अदा कर रहा है. बबलू कहता है, ''मेरे ख्वाबों की दुनिया तो दामिनी में बसी है, जबसे उसे बीमार देखा है, मेरा मन आशंकाओं से भर गया.''

बेटी और पिता के रिश्ते का उत्कर्ष

अपनी माँ की मौत के बाद दामिनी उस समय बीमार पड़ गई जब पिता बबलू ने उसे सीने से लगा लिया और रिक्शा चलाते समय उसे गले में लटके झूले में साथ रखा. क्योंकि घर में कोई और उसकी परवरिश करने वाला नहीं था और बबलू के लिए रिक्शा, रोटी का एकमात्र जरिया था.
उसे तीन दिन पहले भरतपुर में एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जिला कलेक्टर जेपी शुक्ला दो बार उसे देखने अस्पताल गए और रविवार को उन्होंने शिशु रोग विशेषज्ञ से बात की.
"बबलू का पुनर्वास किया जायेगा ताकि वो अपनी लाडली बेटी का ठीक से पालन कर सके. हम स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों से बात कर रहे है ताकि दामिनी के अच्छे और सुखद भविष्य की व्यवस्था हो."
जिला कलेक्टर
डॉक्टर ने उसे तुरंत जयपुर ले जाने की सलाह दी. डॉक्टरों की राय और खुद बबलू के आग्रह पर नन्ही परी को जयपुर लाया गया है. जयुपर पहुँचने के बाद बबलू ने कहा कि उसे भरोसा है दामिनी जल्द ठीक हो जायेगी.
जिला कलेक्टर ने बताया, ''बबलू का पुनर्वास किया जायेगा ताकि वो अपनी लाडली बेटी का ठीक से पालन कर सके. हम स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों से बात कर रहे है ताकि दामिनी के अच्छे और सुखद भविष्य की व्यवस्था हो.''
बबलू को स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर एंड जयपुर ने रिक्शा नज़र कर दिया है. और भी बहुतेरे लोगो ने भारत और विदेशों से मदद का वादा किया है.

हरसत बाबुल बनने की

अमरीका में रह रहे किरन श्रीनिवासन ने दामिनी के लिए एक लाख रूपये की मदद की पेशकश की है. बबलू जिस तरह अपने दामन से दामिनी को लगा कर रिक्शे पर सवारी लेकर घूमा, जिसने भी देखा द्रवित हो गया.
दामिनी के लिए ये दुनिया नयी है, उसे नहीं मालूम कि कैसे लोग नवजात बेटियों को बिसार देते है. लेकिन दामिनी को पहले माँ शांति और पिता बबलू का दुलार मिला और जब शांति इस दुनिया से रुखसत कर गई, बबलू ने उसे ऐसे ह्रदय से लगाया, गोया ये बेटी और पिता के रिश्ते का उत्कर्ष हो.
दामिनी इस मामले में खुशनसीब है कि उसे दुनिया के हर हिस्से से दुलार मिला, फिर चाहे वो विदेश में बसे दीपक पारधी हो, अमेरिका के विजय गढ़वी, किरण श्रीनिवासन, अमिताभ गाँधी, गौतम अरोरा, रवि रविपति, मेलबोर्न के शेलेन्द्र, बेल्जियम के प्रेम जायसवाल हो या पंजाब के सुखनायब सिंधु.
दामिनी ने बेटी होने के नाते उन सैकड़ों लोगों से रिश्तों की ऐसी बुनियाद रखी है जो उस नन्हीं जान से कभी रूबरू नहीं हुए. लेकिन हर लब पर दुआ के अल्फाज हैं युग-युग जियो दामिनी, क्योंकि बबलू की हरसत बाबुल बनने की है.source by bbchindi.com 

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हथगोला फटा, तीन बच्चों की मौत


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बीएसएफ़ के जवान (फ़ाइल फ़ोटो)
बीएसएफ़ का कहना है कि वे ग्रामीणों को फ़ायरिंग रेंज से दूर रहने की हिदायतें जारी करते रहते हैं
झारखण्ड के हज़ारीबाग जिले में सीमा सुरक्षा बल के एक प्रशिक्षण केंद्र के पास हुए विस्फोट में तीन बच्चों के मारे जाने की ख़बर है.

पुलिस का कहना है कि सखिया गाँव के पास स्थित सीमा सुरक्षा बल के फायरिंग रेंज में रोज़ प्रशिक्षु जवान गोलियां चलाने का प्रशिक्षण करते हैं. निशानेबाजी के अलावा जवानों को हथगोला फेंकने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है.यह बच्चे स्थानीय हैं जो प्रशिक्षण केंद्र के पास के गाँव के रहने वाले बताए जाते हैं.
अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सखिया के रहने वाले यह बच्चे फायरिंग रेंज के अंदर खेल रहे थे. तभी उनके हाथ एक पुराना हथगोला लग गया. यह हथगोला जिंदा था मगर बच्चों को पता नहीं चल पाया.
अधिकारियों का कहना है कि खेलने के दौरान हथगोला फट गया जिससे तीन बच्चों की मौत हो गई.
हज़ारीबाग के जिला प्रशासन और सीमा सुरक्षा बल दोनों ने मामले की अलग-अलग जांच शुरू कर दी है.

पुरानी शिकायत

हज़ारीबाग के मेरु में सीमा सुरक्षा बल के फायरिंग रेंज को लेकर पहले भी विवाद रहा है.
ऐसे कई मामले प्रकाश में आए जब जानवर चराने गए ग्रामीणों को प्रशिक्षण कर रहे जवानों की गोलियां लगीं.
स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार से मांग करते रहे हैं कि प्रशिक्षण केंद्र को दूसरी जगह ले जाया जाए जहाँ आबादी नहीं है.
मगर सुरक्षा बल के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने हमेशा प्रशिक्षण के दौरान सावधानी बरती है.
अधिकारियों का कहना है कि टारगेट प्रैक्टिस के दौरान भी लोगों को पहले से चेतावनी दे दी जाती है कि वे इस इलाके में प्रवेश न करें. इसके अलावा भी इलाक़े की नाकेबंदी कर दी जाती है.
मगर जानवर चराते चराते अक्सर ग्रामीण उस इलाके में प्रवेश कर जाते हैं जहाँ गोलियां चलाने का प्रशिक्षण चल रहा होता है.

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फसीह महमूद को दिल्ली लाया गया, गिरफ़्तार


salman khan 
कथित रूप से इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े संदिग्ध चरमपंथी फसीह महमूद को सऊदी अरब से प्रत्यर्पण के बाद सोमवार को दिल्ली लाया गया है कथित रूप से इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े संदिग्ध चरमपंथी फसीह महमूद को सऊदी अरब से प्रत्यर्पण के बाद सोमवार को दिल्ली लाया गया है..                                  फसीह मोहम्मद
source by bbc hindi news 
अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद उन्हें दिल्ली हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया गया है.

साल 2010 में बैंगलोर के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुए धमाके और दिल्ली के जामा मस्जिद में होई गोलीबारी के मामले में पुलिस को फसीह की तलाश थी. फसीह को कर्नाटक और दिल्ली पुलिस तलाश रही थी.दिल्ली और बैंगलोर में हुए बम धमाकों के मुख्य अभियुक्त फसीह महमूद को इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापकों में से एक माना जाता है.
जून 2012 में फसीह को सऊदी अरब में पकड़ा गया था तब से वो सऊदी पुलिस की हिरासत में थे.
मुंबई बम धमाके में गिरफ्तार अबू जिंदाल ने भी बताया था कि फसीह सऊदी पुलिस की हिरासत में है.
आरोप है कि फसीह महमूद लश्कर के लिए भर्ती का काम करता था.
अधिकारियों का दावा है कि फसीह की गिरफ्तारी के बाद भारत में आतंक की कई साजिशों का पर्दाफाश हो सकेगा.

इंटरपोल की मदद

इससे पहले फसीह महमूद की पत्नी निखात परवीन ने उच्चतम न्यायालय में दावा किया था कि उनके पति केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की हिरासत में हैं, हालांकि सरकार ने इस आरोप से इनकार किया था.
फसीह को कथित तौर पर कुछ सऊदी और भारतीय अधिकारियों ने 13 मई 2012 को सऊदी राज्य के अल जुबैल शहर से पकड़ा था.
बिहार के दरभंगा जिले में बाढ़ समैला गाँव के रहने वाले फ़सीह महमूद पिछले पाचं सालों से सऊदी अरब में इंजीनियर के रूप में काम कर रहे थे.
दिल्ली और कर्नाटक पुलिस के कहने पर फसीह महमूद की तलाश करने के लिए सीबीआई ने इंटरपोल की मदद मांगी थी.
दोनों राज्यों की पुलिस मानती है कि वो साल 2010 के बैंगलौर और दिल्ली में हुए धमाकों से जुड़े हैं.

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पाकिस्तान पर ओबामा और रोमनी की एक राय


salman khan 
source by bbc hindi 
राष्ट्रपति चुनाव से पहले ओबामा और रोमनी के बीच यह तीसरी बहस थी
राष्ट्रपति ओबामा और मिट रोमनी के बीच हुई तीसरी बहस से पहले राजनीतिक रणनीतिकारों ने दोनों को सलाह दी थी कि वह पाकिस्तान पर अपना ध्यान केंद्रित करें क्योंकि उनके अनुसार आने वाले दिनों में पाकिस्तान अमरीकी विदेश नीति का सबसे बड़ा मुद्दा होगा.
पाकिस्तान का नंबर काफी बाद में आया. सबसे पहले ओबामा ने रोमनी पर हमला बोलते हुए 2007 में दिए गए उस वकतव्य की आलोचना की जिसमें उन्होंने सवाल पूछा था कि अमरीका को मात्र एक आदमी को ढ़ूढ़ने के लिए किसने प्रयास करने चाहिए.

ओबामा का कहना था कि उस आदमी को पाने के लिए वास्तव में ज़मीन आसमान एक करने की ज़रूरत थी और ऐसा हमने किया भी. अगर हमने पाकिस्तान की अनुमति ली होती तो हम ओसामा के कभी भी नहीं पा पाते.उन्होंने कहा, ’आपने कहा था कि हमें एक आदमी के पाने के लिए ज़मीन आसमान एक नहीं कर देना चाहिए. और आपने यह भी कहा था कि हमें उसे पाकिस्तान में ढ़ूढ़ने से पहले पाकिस्तान की अनुमति लेनी चाहिए.’
दोनों प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को अमरीकी विदेश नीति से दरकिनार किए जाने के पक्ष में नहीं थे.रोमनी ने पाकिस्तान पर बिना लाग लपेट के टिपण्णी करते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान असफल होता है कि तो यह अफ़गानिस्तान के लिए बहुत बड़ा खतरा होगा. वह पाकिस्तान की सही दिशा में चलने में मदद करेंगे.

ड्रोन हमलों पर एक राय

उनका कहना था कि पाकिस्तान को उसके हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता खासतौर से जब उस देश के पास सौ से अधिक परमाणु हथियार हों और जहाँ सेना और आईएस आई की ही चलती हो.
रोमनी ने यह भी कहा कि तकनीकी रूप से पाकिस्तान एक सहयोगी देश है जो सहयोगी देश की तरह काम नहीं कर रहा है. संचालक ने जब दोनों लोगों से सीधा सवाल पूछा कि पाकिस्तान में ड्रोन हमलों के बारे में वह क्या सोचते हैं तो रोमनी का कहना था कि वह उसका पूरी तरह से समर्थन करते हैं और अगर वह राष्ट्रपति बन भी जाते हैं तब भी उसका प्रयोग जारी रखेंगे.

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Monday, 8 October 2012

'मौक़ा मिला तो फिर वेश्या बनूंगी...'

सोमवार, 8 अक्तूबर, 2012 को 08:26 IST तक के समाचार
source by bbcnews hindi
वैश्यावृत्ति
शोधकर्ता और कभी ख़ुद एक सहचरी (एस्कॉर्ट वुमन) के तौर पर काम कर चुकीं डॉक्टर ब्रुक मैगनानटी का कहना है कि वेश्यावृति ने उन्हें सशक्तिकरण प्रदान किया है.
उन्होंने कहा कि अगर उन्हें मौक़ा मिला तो वो दोबारा वेश्यावृति में जाना चाहेंगी लेकिन उन्हें लगता है कि जो काम वो करती थीं उसके लिए उनकी उम्र थोड़ी ज़्यादा हो गई है.
डॉक्टर मैगनानटी का कहना है कि जो लोग इस मामले को दूसरी तरह से देखते हैं वो दरअसल इस पूरे काम को समझते ही नहीं हैं.
बीबीसी के विशेष प्रोग्राम हार्डटॉक में काट्या एडलर से बात करते हुए ब्रुक मैगनानटी ने कहा कि औरतों के अधिकार का झंडा बुलंद करने वालों के एक बहुत बड़े तबक़े को इस पूरे कामकाज की समझ ही नहीं है.
पारलैंगिक और पुरुष भी शामिल
ब्रुक मैगनानटी का कहना है कि ज्यादातर लोगों को इस वैश्यावृत्ति के कामकाज की समझ नहीं है
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को लगता है कि सिर्फ़ महिलाएं ही इस उद्योग का हिस्सा बनाई जाती हैं और वो भी जबरन, लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि इस काम में अब ट्रांसजेंडर या पारलैंगिकों से लेकर पुरुष तक शामिल हो रहे हैं.
ब्रुक मैगनानटी ने कहा कि दुनिया भर में पुरूष वेश्यावृति का एक बड़ा बाज़ार है जिनकी सेवाओं की ख़रीदार धनवान महिलाएं हैं.
औरतों के हक़ के पक्ष में लिखने वाली एक महिला के हवाले से पूछे गए एक सवाल के जवाब में मैगनानटी ने कहा, ''पुरूष वेश्याओं का एक समूह इसलिए तैयार करते हैं क्योंकि इससे उनकी महिलाओं पर वर्चस्व की भावना और अहंकार की पूर्ति होती है.''
यौन संबंधों के तजुर्बे
"पुरूष वेश्याओं का एक समूह इसलिए तैयार करते हैं क्योंकि इससे उनकी महिलाओं पर वर्चस्व की भावना और अहंकार की पूर्ति होती है"
ब्रुक मैगनानटी, पूर्व यौनकर्मी
मैगनानटी पहले एक ब्लॉग लिखा करतीं थीं जिसमें वो अपने यौन संबंधो के तजुर्बों के बारे लिखती थीं, जो काफ़ी विवादास्पद रहा था.
साक्षात्कार के दौरान उन्होंने यूरोप के कई देशों जैसे फ्रांस की संसद के उस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया जिसमें एक पारित प्रस्ताव के ज़रिए समाज से वेश्यावृति को पूरी तरह ख़त्म करने की बात कही गई है.
उन्होंने कहा कि ये पूरी तरह अव्यावहारिक है क्योंकि विश्व इतिहास में कभी भी, कहीं भी ऐसा समाज रहा ही नहीं है जिसमें वेश्यावृति नहीं रही हो.

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दो शिशुओं के शव नाले में मिले, चर्चाएं तेज - Bharat Shukla

उन्नाव: शहर में भ्रूण हत्या और अवैध गर्भपात का धंधा जारी है। अक्सर शहर के नालों में मिलने वाले नवजात शिशुओं के शव इन्हीं अवैध कारोबारियों की करतूत मानी जा रही है। शनिवार को शहर के आदर्शनगर में मुख्यमार्ग के किनारे नाले में दो शिशुओं के शव देखे गए। जानकारी देने के कई घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची, इसबीच एक शव बह चुका था जबकि दूसरे शव को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया।
शहर में शनिवार को प्रात: चंद्रलोक पैलेस के सामने स्थित दुकानों के मालिकों ने नाले में 2 शिशुओं के शव पड़े देखे। कुछ ही देर में राह चलते लोगों का मजमा लग गया। जो शिशुओं के शव देखता वही उनकी अनाम कलयुग मां को कोसने लगता। लगभग 4 घंटे तक शव नाले में पड़े रहे इस बीच एक शव बह गया। पुलिस मध्याह्न 2.30 बजे मौके पर पहुंची, इस बीच एक शव पानी के साथ बह चुका था। एक शव लड़की का था जिसे पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। नाले में जिस स्थान पर शव मिला है उसके आसपास कई नर्सिग होम हैं। जिला अस्पताल भी थोड़ी ही दूरी पर है। शव देखने वालों की भीड़ में शामिल इंद्रानगर निवासिनी किरन पत्‍‌नी कृष्ण कुमार, कंचन शुक्ल पत्‍‌नी शशीकांत सिंह आदि ने कहा कि शहर में अवैध रूप से गर्भपात का धंधा चोरी छिपे संचालित है यह शव उन्हीं की देन है।

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सेंसेक्स के उतार चढ़ाव पर लगता लाखों का सट्टा - Bharat Sukla

 
उन्नाव। सेंसेक्स का उतार चढ़ाव जिले में कई हजार ऐसे लोगों को लाखों का फायदा या नुकसान करवा रहा है जिन्होंने कभी शेयर खरीदे ही नहीं है। जिले के सट्टेबाजों के निशाने पर सेंसेक्स और निफ्टी के अलावा विदेशी शेयर बाजार भी शामिल हैं। आपको सिर्फ सेंसेक्स कितने पर रुकेगा उस अंक का अंदाज लगा कर रुपए लगाना है। यदि आपका अंक आ गया तो एक रुपया के एवज में आठ रुपए मिलेंगे। रोजाना एक करोड़ से अधिक के सट्टा बाजार के बारे में पुलिस जानबूझ कर अनजान बनी हुई है।
क्रिकेट का बुखार कम होने पर यह सट्टेबाज सेंसेक्स, निफ्टी, नास्डाक सहित सभी विदेशी शेयर बाजारों के संवेदी सूचकांक पर दांव लगवा रहे हैं। संवेदी सूचकांक पर दांव लगाने वाले को अंतिम नंबर मिलने पर एक रुपया पर आठ रुपए, अंतिम दो नंबर मिलने पर अस्सी रुपए, और तीन नंबर मिलने पर आठ सौ रुपए मिलतेे हैं। दांव लगाने वालेे को सिर्फ सट्टेबाज या उसके एजेंट को फोन करना होता है। एजेंट उसके पास पहुंच कर रुपए लेने के साथ ही मोबाइल पर नंबर और एमाउंट नोट करवा देता है वहां से मिला कोड नंबर
ग्राहक को दे दिया जाता है। सट्टेबाजी का यह धंधा शहर के सब्जी मंडी, बस स्टाप, धवन रोड, आढ़त मंडी, कंजी, तकी नगर, तालिब सराय, छिपियाना चौराहा, छोटा चौराहा, ककरहा बाग, सहित करीब दो दर्जन मोहल्लों में खुले आम चल रहा है।
सपा नगर उपाध्यक्ष मो. आसिम ने बताया कि इस समस्या को समाप्त करने के लिए वह एसपी जे रवींदर गौड़ से मिले थे। एसपी ने भी शहर में बढ़ती सट्टेबाजी की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए इसे समाप्त कराने का आश्वासन दिया था।
सट्टेबाजी से जुड़े एक युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सिपाही चौकी से लेकर थानों तक के रेट तय हैं हर माह उनका हिस्सा जो कि एक हजार से लेकर बीस हजार तक होता है पहुंचा दिया जाता है। एजेंट ने बताया कि जिले के तार कानपुर, लखनऊ, दिल्ली और मुंबई के बड़े माफियाओं से जुड़े हैं यदि कोई व्यक्ति बड़ी रकम दांव पर लगाता है तो यहां के सट्टा मालिक इसकी जानकारी महानगरों में बैठे अपने आकाओं को तुरंत देते हैं। बताया कि एजेंट शहर में पान की दुकान, चाय, कोल्ड ड्रिंक के होटलाें और परचून की दुकानों पर हमेशा उपलब्ध रहते हैं। रविवार शेयर बाजार बंद रहने पर संवेदी सूचकांक पर सट्टा नहीं लगता है।
कोतवाल कृपाशंकर सरोज ने बताया कि सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। बताया कि सट्टेबाजों का कोई अड्डा नहीं होता है यह कहीं भी चाय पान की दुकान, चौराहे या सड़क पर खड़े होकर मोबाइल से सौदा तय करते हैं इसलिए इन्हें पकड़ने में मुश्किलेें आ रही हैं। बताया कि तीन दिन पहले चार सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया गया है उनसे शहर के अन्य सट्टेबाजों के बारे में पता किया जा रहा है जल्द ही अभियान चला कर बड़े खिलाड़ियों को भी पकड़ा जाएगा।

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Wednesday, 3 October 2012

दुनिया के सात महापाप क्या हैं?

गुरुवार, 27 सितंबर, 2012 को 13:47 IST तक के समाचार
suhail ahmad
source by bbc news
पेटूपन न सिर्फ़ बुराईयों की जड़ है यह आपका स्वास्थ भी ख़राब करता है
अकसर आप लोगों ने दुनिया के सात आश्चर्य यानी seven wonders के बारे में सुना पढ़ा, और देखा होगा. इन अजूबों में अब भारत का ताजमहल भी शामिल है, लेकिन क्या आप सात महापाप के बारे में भी जानते हैं?
हम लेकर आए हैं दुनिया के सात महापाप. क्या होते हैं ये सात महापाप? अंग्रेज़ी भाषा और पश्चिमी साहित्य एवं संस्कृति में इसे किस प्रकार देखा जाता है?
अंग्रेज़ी में इन्हें सेवेन डेडली सिंस (Seven deadly sins) या कैपिटल वाइसेज़ (Capital vices) या कारडिनल सिंस (Cardinal sins) भी कहा जाता है.
जब से मनुष्य ने होश संभाला है तभी से उनमें पाप-पुण्य, भलाई-बुराई, नैतिक-अनैतिक जैसे आध्यात्मिक विचार मौजूद हैं. सारे धर्म और हर क्षेत्र में इसका प्रचलन किसी न किसी रूप में ज़रूर है.
यह सेवेन डेडली सिंस (Seven deadly sins) या कैपिटल वाइसेज़ (Capital vices) या कारडिनल सिंस (Cardinal sins) इस प्रकार हैं:
लस्ट (Lust)
ग्लूटनी (Gluttony)
ग्रीड (Greed)
स्लौथ (Sloth)
रैथ (Wrath)
एनवी (Envy)
प्राइड (Pride)
ये सारे शब्द भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun) के रूप हैं. लेकिन इनमें से कई का प्रयोग क्रिया और विशेषण के रूप में भी होता है. अगर इन्हें ग़ौर से देखें तो पता चलता है कि इन सारे महापाप की हर जगह भरमार है.
पुराने ज़माने में इन सब को बड़े पाप में शामिल किया जाता था और उनसे बचने की शिक्षा दी जाती थी. पुराने ज़माने में ईसाई धर्म में इन सबको घोर पाप की सूची में रखा गया था क्योंकि इनकी वजह से मनुष्य सदा के लिए दोषी ठहरा दिया जाता था और फिर बिना कंफ़ेशन के मुक्ति का कोई चारा नहीं था.
सेक्स शॉप
कामवासना या कामुकता को सात महापापों में से एक माना जाता है.
लस्ट (Lust) यानी लालसा, कामुकता, कामवासना (Intense or unrestrained sexual craving)- ये मनुष्य को दंडनीय अपराध की ओर ले जाते हैं और इनसे समाज में कई प्रकार की बुराईयां फैलती हैं. विशेषण में इसे लस्टफुल (lustful) कहते हैं
ग्लूटनी (Gluttony) यानी पेटूपन. इसे भी सात महापापों में रखा गया है. जी हां दुनिया भर में तेज़ी से फैलने वाले मोटापे को देखें तो यह सही लगता है कि पेटूपन बुरी चीज़ हैं और हर ज़माने में पेटूपन की निंदा हुई है और इसका मज़ाक़ उड़ाया गया है. ठूंस कर खाने को महापाप में इस लिए रखा गया है कि एक तो इसमें अधिक खाने की लालसा है और दूसरे यह ज़रूरतमंदों के खाने में हस्तक्षेप का कारण है.
मध्यकाल में लोगों ने इसे विस्तार से देखा और इसके लक्षण में छह बातें बताईं जिनसे पेटूपन साबित होता है. वह इस प्रकार हैं.
eating too soon--------------eating too eagerly
eating too expensively----- eating too daintily
eating too much-------------eating too fervently
ग्रीड (Greed) यानी लालच, लोभ. यह भी लस्ट और ग्लूटनी की तरह है और इसमें अत्यधिक प्रलोभन होता है. चर्च ने इसे सात महापाप की सूची में अलग से इस लिए रखा है कि इसमें धन-दौलत का लालच शामिल है (An excessive desire to acquire or possess more than what one needs or deserves, especially with respect to material wealth)
स्लौथ (Sloth) यानी आलस्य, सुस्ती और काहिली (Aversion to work or exertion; laziness; indolence). पहले स्लौथ का अर्थ होता था उदास रहना, ख़ुशी न मनाना.
इसे महापाप में इसलिए रखा गया था कि इसका मतलब था ख़ुदा की दी हुई चीज़ से परहेज़ करना. इस अर्थ का पर्याय आज melancholy, apathy, depression, और joylessness होगा. बाद में इसे इसलिए पाप में शामिल रखा गया क्योंकि इसकी वजह से आदमी अपनी योग्यता और क्षमता का प्रयोग नहीं करता है.
रैथ (Wrath) ग़ुस्सा, क्रोध, आक्रोश. इसे नफ़रत और ग़ुस्से का मिला जुला रूप कहा जा सकता है जिसमें आकर कोई कुछ भी कर जाता है. ये सात महापाप में अकेला ऐसा पाप है जिसमें आपका अपना स्वार्थ शामिल न हो (Forceful, often vindictive anger)
एनवी (Envy) यानी ईर्ष्या, डाह, जलन, हसद. यह ग्रीड यानी लालच से इस अर्थ में अलग है कि ग्रीड में धन-दौलत ही शामिल है जबकि यह उसका व्यापक रूप है. यह महापाप इसलिए है कि कोई गुण किसी में देख कर उसे अपने में चाहना और दूसरे की अच्छी चीज़ को सहन न कर पाना.
प्राइड (Pride) यानी घमंड, अहंकार, अभिमान को सातों माहापाप में सबसे बुरा पाप समझा जाता है. किसी भी धर्म में इसकी कठोर निंदा और भर्त्सना की गई है. इसे सारे पाप की जड़ समझा जाता है क्योंकि सारे पाप इसी के पेट से निकलते हैं. इसमें ख़ुद को सबसे महान समझना और ख़ुद से अत्यधिक प्रेम शामिल है.
अंग्रेज़ी के सुप्रसिद्ध नाटककार क्रिस्टोफ़र मारलो ने अपने नाटक डॉ. फ़ॉस्टस में इन सारे पापों का व्यक्तियों के रूप में चित्रण किया है. उनके नाटक में यह सारे महापाप इस क्रम pride, greed, envy, wrath, gluttony, sloth, lust में आते हैं.
अब जबकि आपने सात अजूबों के साथ सात महापाप भी देख लिए हैं तो ज़रा सात महापुण्य भी देख लें. यह इस प्रकार हैं.
लस्ट (Lust)--------- Chastity पाकीज़गी, विशुद्धता,
ग्लूटनी (Gluttony)-- Temperance आत्म संयम, परहेज़,
ग्रीड (Greed)-------- Charity यानी दान, उदारता,
स्लौथ (Sloth)--------Diligence यानी परिश्रमी,
रैथ (Wrath)--------- Forgiveness यानी क्षमा, माफ़ी
एनवी (Envy)---------Kindness यानी रहम, दया,
प्राइड (Pride)-------- Humility विनम्रता, दीनता, विनय
तो फिर क्या सोच रहे हैं. चलिए इन महापापों से बचने और सदगुणों को अपनाना की प्रक्रिया शुरु कर दीजीए.

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वेस्टइंडीज़ क्रिकेटरों के कमरे में घुसीं लड़कियाँ

 बुधवार, 3 अक्तूबर, 2012 को 16:46 IST तक के समाचार
source by bbc news hindi
वेस्टइंडीज़
वेस्टइंडीज़ की टीम विश्व कप के सेमी फ़ाइनल में है
श्रीलंका में पुलिस ने तीन ब्रितानियों लड़कियों को वेस्टइंडीज़ के कुछ क्रिकेट खिलाड़ियों के कमरों में प्रवेश करने के शक में पकड़ा है.
एएफफी के मुताबिक इन खिलाड़ियों में क्रिस गेल भी शामिल बताए जा रहे हैं.
ट्वेन्टी-20 विश्व कप के चलते वेस्ट इंडीज़ की टीम कोलंबो में है. वेस्टइंडीज़ टीम होटल सिनामेन ग्रैंड में रुकी हुई है और लड़कियों को वहीं से गिरफ्तार किया गया है.
पुलिस ने बीबीसी को भेजे बयान में कहा है, “खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए तैनात विशेष गार्डों ने लड़कियों को पकड़ा और उन्हें नज़दीकी पुलिस स्टेशन में सौंप दिया गया ताकि मामले की जाँच हो सके.”

सुरक्षा चिंता

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आईसीसी ने इस मामले पर कोई आपत्ति नहीं जताई है और न ही कोई शिकायत ही दर्ज की है, इसलिए इन लड़कियों को छोड़ दिया गया.
उनसे कहा गया है कि ज़रूरत पड़ने पर पुलिस स्टेशन रिपोर्ट करना होगा.
वर्ष 2007 के विश्व कप के दौरान पाकिस्तान के कोच बॉब वूल्मर अपने कमरे में मृत पाए गए थे. उसके बाद से आईसीसी की क्रिकेट प्रतियोगिताओं में सुरक्षा को लेकर और भी ज़्यादा ध्यान रखा जाता है.
वेस्टइंडीज़ की टीम विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बना चुकी है. शुक्रवार को उसका ऑस्ट्रेलिया से सेमीफाइनल मुकाबला है.

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गुजरात में ग़रीबों को गोलियाँ मिलती हैं: सोनिया

बुधवार, 3 अक्तूबर, 2012 को 16:18 IST तक के समाचार
                                                                                      
                                                                                    सोनिया गांधी गुजरात चुनाव प्रचार पर निकली हुई हैं
source by bbc news 
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुजरात में चुनाव अभियान शुरू करते हुए नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है.
राजकोट में दिए भाषण में सोनिया गांधी ने इस बार नरेंद्र मोदी पर कोई निजी टिप्पणी नहीं की, लेकिन उनके विकास और सुशासन के दावों पर सवाल उठाए.
हालांकि इससे एक दिन पहले मोदी ने आरोप लगाया था कि सरकार ने सोनिया के विदेशी दौरों और उपचार पर 1800 करोड़ रुपए खर्च कर डाले हैं.
पर इसके जवाब में सोनिया ने इतना भर कहना ही मुनासिब समझा कि विपक्ष निराधार आरोप लगा रहा है जिस वजह से अहम मुद्दे नज़रअंदाज़ हो रहे हैं
उन्होंने कहा, “गुजरात में जब गरीब लोग अपने हक माँगते हैं तो उन्हें गोलियाँ मिलती हैं.”
गुजरात विधानसभा चुनाव दिसंबर में होना है. अपने भाषण को सोनिया बनाम मोदी न बनाते हुए इस बार सोनिया गांधी ने गुजरात सरकार को राज्य का समुचित विकास न करने के लिए कोसा.

एएफडीआई की वकालत

"किसान को फसल की असली कीमत तभी मिलेगी जब उसे बिचौलियों से निजात मिले. उससे भी अहम बात ये है कि जो राज्य सरकार नहीं चाहती वो एफ़डीआई लागू नहीं कर सकती. फिर इस पर इतना हंगामा क्यों मच रहा है."
सोनिया गांधी
उन्होंने भाषण के ज़रिए यूपीए सरकार की उपलब्धियाँ गिनाईं और डीज़ल की कीमत बढ़ाने के पीछे सरकारी पक्ष रखा.
सोनिया का कहना था, “यूपीए सरकार ने न सिर्फ किसानों का कर्ज़ माफ किया बल्कि उत्पादों का न्यूनतम मूल्य भी बढ़ाया. कांग्रेस सरकार ने हर क्षेत्र में काम किया है चाहे वो मूलभूत ढाँचा हो या ग्रामीण क्षेत्र. शायद आपसे ये बात छिपाई जा रही है कि यूपीए सरकार ने एनडीए सरकार की तुलना में गुजरात को 50 फीसदी ज़्यादा फंड दिया है.”
सोनिया ने भाषण के बहाने एफडीआई की वकालत भी की और गुजरात के किसानों को इसके फायदे गिनवाए.
उन्होंने कहा, “किसान को फसल की असली कीमत तभी मिलेगी जब उसे बिचौलियों से निजात मिले. उससे भी अहम बात ये है कि जो राज्य सरकार नहीं चाहती वो एफ़डीआई लागू नहीं कर सकती. फिर इस पर इतना हंगामा क्यों मच रहा है.”
उन्होंने ये भी कहा कि वैट पर शिकायत तो सब करते हैं लेकिन गुजरात में वैट सबसे ज़्यादा है.
यानी भाषण का पूरा ज़ोर गुजरात और विकास पर था. पिछली बार चुनावी अभियान में सोनिया गांधी ने मोदी को मौत का सौदागर कहा था.
सोनिया में अपने भाषण में लोकपाल का भी ज़िक्र किया और इसके पारित न होने के लिए भाजपा को दोषी ठहराया.
इसके जवाब में भाजपा नेता बलबीर पुंज ने कहा कि सोनिया ने राजनीतिक कारणों से भाजपा के बारे में अर्धसत्य बोला है.

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गुजरात और हिमाचल में चुनावी रणभेरी

 बुधवार, 3 अक्तूबर, 2012 को 17:02 IST तक के समाचार
source by bbc hindi news
नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी इस समय गुजरात के मुख्यमंत्री हैं
गुजरात में विधानसभा चुनाव 13 दिसंबर और 17 दिसंबर को होंगे जबकि हिमाचल प्रदेश में चार नवंबर को चुनाव कराए जाएंगे. दोनों ही राज्यों में 20 दिसंबर को मतगणना होगी.
दोनों राज्यों में आचार संहिता लागू कर दी गई है.
मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस संपत ने दिल्ली में बुधवार को इस बारे में ऐलान करते हुए कहा कि हिमाचल में अधिसूचना 10 अक्तूबर को जारी की जाएगी.
उन्होंने कहा कि नामांकन भरने की अंतिम तिथि 17 अक्तूबर होगी. नामांकन पत्र की जांच 18 अक्तूबर को होगी जबकि 20 अक्तूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे.

मतगणना

चुनाव चार नवंबर को होंगे जबकि 20 दिसंबर को मतगणना होगी.
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि गुजरात में मतदान दो चरणों में होगा. इसकि लिए अधिसूचना 17 नवंबर और 23 नवंबर को होगी.
नामांकन भरने की अंतिम तिथि 24 नवंबर और दूसरे चरण के लिए 30 नवंबर होगी. नामांकन पत्र की जांच 26 नवंबर और एक दिसंबर को होगी जबकि 28 नवंबर और तीन दिसंबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे.
राज्य में पहले चरण के मतदान 13 दिसंबर को जबकि 17 दिसंबर को दूसरे चरण के मतदान होंगे. 20 दिसंबर को दोनों चरणों की मतगणना होगी.
गुजरात में कुल 34,496 मतदान केंद्र हैं जबकि वहां 3.78 करोड़ वोटर हैं. गुजरात में कुल 182 सीटें हैं.
68 सीटों वाले राज्य हिमाचल प्रदेश में 7,252 पोलिंग स्टेशन हैं और वहां 45 लाख मतदाता हैं.

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T-20 WC: कोहली रोए, राजीव शुक्‍ला नाखुश

T-20 WC: कोहली रोए, राजीव शुक्‍ला नाखुश

source by Dainikbhaskar.com 
खेल डेस्क. बीसीसीआई का टोटका काम नहीं आया। आईसीसी ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया का सफर सुपर-8 स्टेज में ही खत्म हुआ। साउथ अफ्रीका के खिलाफ करो या मरो मैच में धोनी ब्रिगेड (जिसके आधे सिपाही 30 से ज्‍यादा उम्र के थे) ने 1 रन से रोमांचक जीत तो दर्ज की, लेकिन वह सेमी फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी। अंतिम चार में पहुंचने के लिए भारतीय टीम को 32 या उससे अधिक रनों के अंतर से जीतना था, लेकिन फाफ डु प्लेसिस की तूफानी पारी ने उसे महरूम कर दिया। इस हार के बाद विराट कोहली की आंखों से आंसू निकल पड़े तो राजीव शुक्‍ला ने कहा कि वह टीम के प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। (देखें विश्‍व कप की 25 ऑफबीट तस्‍वीरें)
भारतीय टीम कम नेट रन रेट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो गई। टी-20 वर्ल्ड कप में पहले मुकाबले के बाद से ही टीम इंडिया के कमजोर बॉलिंग अटैक की चर्चा हो रही थी। धोनी एंड कंपनी ने चार टीमों को टूर्नामेंट के दौरान ऑल आउट तो किया, फिर भी वे ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान जैसी टीमों से पीछे ही रही। न तो टीम के गेंदबाज स्टार साबित हुए, न ही बल्लेबाजों ने चैंपियन जैसा परफॉर्मेंस दिया। क्रिकेट एक्‍सपर्ट विनोद कांबली ने सीधे तौर पर युवराज,सहवाग और गंभीर को जिम्‍मेदार ठहराया। उन्‍होंने कहा कि टी-20 फॉरमैट में पूरा दारोमदार बल्‍लेबाजों पर ही होता है। जब बल्‍लेबाज ही नहीं चले तो आप गेंदबाजों को क्‍या कहेंगे। (भारत से हार पर भड़का पाकिस्‍तान)
टूर्नामेंट का पहला सेमी फाइनल मैच श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच 4 अक्टूबर को खेला जाएगा। दूसरा सेमी फाइनल उसके अगले दिन यानी 5 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया और वेस्ट इंडीज के बीच होगा। लेकिन लगातार तीसरी बार भारत सेमीफाइनल से पहले ही मुकाबले से बाहर हो गया है।

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Monday, 1 October 2012

सुपर ओवर में जीता वेस्ट इंडीज

salman khan 
source by Dainikbhaskar.com सुपर ओवर में जीता वेस्ट इंडीज
पल्लेकल. आईसीसी ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 मैच में वेस्ट इंडीज ने न्यूजीलैंड को सुपर ओवर में हरा कर सेमी फाइनल की उम्मीदें बरकरार रखीं। न्यजीलैंड ने सुपर ओवर में पहले बल्लेबाजी करते हुए 17 रन बनाए। जवाब में कैरिबियाई टीम ने 1 गेंद शेष रहते 18 रन के लक्ष्य को हासिल कर लिया। गेल और सैम्युल्स ने 1-1 छक्का लगाया।
 
 
मैन ऑफ द मैच सुनील नारायण की बेहतरीन गेंदबाजी के बाद क्रिस गेल और मार्लन सैम्युल्स की आतिशी बल्लेबाजी के दम पर वेस्ट इंडीज ने न्यूजीलैंड को हराया। पल्लेकल के महिंदा राजपक्षे स्टेडियम में हुए टी-20 वर्ल्ड कप का सुपर-8 मैच में दोनों टीमों ने निर्धारित 20-20 ओवरों में 139-139 रन बनाए। टी-20 क्रिकेट के 8वें टाई मैच का नतीजा सुपर ओवर से निकाला गया।
 
सुपर ओवर में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 17 रन बनाए। कप्तान रोस टेलर ने 1 छक्का और 1 चौका लगा कर टीम को 17 रन के स्कोर तक पहुंचाया, लेकिन यह स्कोर गेल और सैम्युल्स की तूफानी बैटिंग के आगे बौना साबित हुआ।
 
गेल और सैम्युल्स के छक्कों और टिम साउथी की घटिया गेंदबाजी के दम पर वेस्ट इंडीज ने 18 रन के लक्ष्य को 1 गेंद शेष रहते ही हासिल कर लिया।
 
मौजूदा टूर्नामेंट में यह दूसरा मैच टाई हुआ है। इससे पहले श्रीलंका और न्यूजीलैंड के बीच हुआ पहला सुपर-8 मुकाबला भी टाई रहा था। उस मैच में हुए सुपर ओवर में श्रीलंका ने बाजी मारी थी।
 
सेमी फाइनल का समीकरण
 
वेस्ट इंडीज की टीम दो मैच जीत कर 4 अंकों के साथ दूसरे पायदान पर है। कैरिबियाई टीम के अंतिम चार में पहुंचने के लिए श्रीलंका की इंग्लैंड पर जीत जरूरी है। यदि इंग्लैंड श्रीलंका को हरा देता है तो नेट रन रेट के आधार पर सेमी फाइनलिस्ट टीम का फैसला होगा।
 
मैन ऑफ द मैच सुनील नारायण
 
स्पिनर सुनील नारायण ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 20 रन देकर 3 विकेट झटके। उनकी इसी बॉलिंग के कारण कैरिबियाई टीम ने कीवी बल्लेबाजों को बांधे रखा।
 
अंतिम ओवर का रोमांच
 
कीवी पारी का आखिरी ओवर रोमांचक रहा। अंतिम 6 गेंदों पर न्यूजीलैंड को जीत के लिए 14 रन चाहिए थे। कप्तान रोस टेलर ने चौथी गेंद पर छक्का लगा कर इस अंतर को कम किया। आखिरी गेंद पर न्यूजीलैंड जीत से महज 2 रन दूर था, लेकिन कैरिबियाई फील्डरों ने सटीक थ्रो कर ब्रेसवैल को रन आउट कर दिया। इस रन आउट के साथ ही मैच टाई हो गया।
स्टार रहे साउथी
 
टिम साउथी और डग ब्रेसवैल की शानदार गेंदबाजी के दम पर न्यूजीलैंड ने वेस्ट इंडीज टीम को 19.3 ओवरों में 139 रन के स्कोर पर ऑल आउट किया। टॉस हार कर पहले बल्लेबाजी करते हुए कैरिबायाई टीम ने न्यूजीलैंड के सामने 140 रन की चुनौती रखी।
 
क्रिस गेल ने वेस्ट इंडीज के लिए सर्वाधिक 30 रन बनाए। किरॉन पोलार्ड ने 28 रन और मार्लन सैम्युल्स ने 24 रन की उपयोगी पारी खेली।
 
टिम साउथी ने बेहतरीन परफॉर्मेंस करते हुए महज 21 रन देकर 3 विकेट झटके। उन्होंने क्रिस गेल (30) के अलावा कैरिबियाई कप्तान डैरेन सैमी (28) और सुनील नारायण (24) को आउट किया। इसके अलावा डग ब्रेसवैल ने भी 31 रन देकर 3 बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई।

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