Saturday, 26 May 2012

महिला चरित्रहीन है तो भी नहीं कर सकते उसका बलात्‍कार: सुप्रीम कोर्ट

sarfaraz ahmad
dainik bhaskar news

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि कोई महिला अगर कमजोर चरित्र की भी है तब भी उसके साथ दुष्कर्म की इजाजत नहीं दी जा सकती। जस्टिस बीएस चौहान व दीपक मिश्र की बेंच ने दुष्कर्म के मामले की सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी।   
चिराग दिल्ली के रहने वाले नरेंद्र कुमार नामक व्यक्ति को उसके पड़ोसी की पत्नी से दुष्कर्म का दोषी माना गया था। इस आरोप में उसे सात साल की सजा दी गई थी। घटना 1999 में हुई थी। अपने बचाव में उसने तर्क दिया था कि महिला कमजोर चरित्र की थी। उसके साथ कई युवकों के संबंध थे। इस तर्क को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा, 'भले ही इसके सबूत हों कि महिला लोगों से शारीरिक संबंध बनाने की आदी है। फिर भी उसे यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह किस के साथ संबंध बनाए, किसके साथ नहीं। वह कोई कमजोर शिकार नहीं कि उसके साथ कोई भी दुराचार कर ले।'  
हालांकि इस व्यवस्था के बावजूद शीर्ष अदालत ने नरेंद्र को आरोप मुक्त कर दिया। इसका आधार यह बताया कि पीडि़त महिला का बयान बहुत कमजोर है। उस पर यकीन नहीं किया जा सकता। 

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